Share क्या होता है? Meaning, Price और Market Cap समझें!

Share का Hindi meaning होता है हिस्सा या अंश

अब यह हिस्सा किस चीज का हो सकता है?

वो हो सकता है किसी company की ownership यानि स्वामित्व का।

मान लीजिए ABC Limited नाम की एक company है और उसकी ownership को 10 लाख बराबर हिस्सों में बाँटा गया है।

अब इनमें से हर हिस्सा एक Share है।

अगर आपके पास इस company के 100 shares हैं तो आप भी उस company में थोड़ी सी हिस्सेदारी रखते हैं।

यही Share को समझने का सबसे आसान तरीका है।

लेकिन एक बात यहीं पर साफ कर लेते हैं।

Share की ownership, उसका Face Value और Stock Market में चल रही उसकी Price तीन अलग बातें हैं।

यहीं पर नए investors सबसे ज्यादा confuse होते हैं।

आइये इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं।

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शेयर क्या होता है? Share Meaning in Hindi

शेयर मार्केट

Share का Hindi meaning होता है हिस्सा या अंश

एक Share किसी company में ownership की एक unit होती है।

आसान शब्दों में कहा जाए तो company की ownership या कुल पूँजी को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटा जाता है और इन हिस्सों को ही Shares कहा जाता है।

Stock Market के संदर्भ में हम आमतौर पर listed companies के Equity Shares की बात करते हैं जिन्हें Stock Exchange पर खरीदा और बेचा जा सकता है।

मान लीजिए ABC Limited के कुल 10 लाख outstanding shares हैं।

आपने इनमें से 100 shares खरीद लिए।

तब company में आपकी हिस्सेदारी होगी:

100 ÷ 10,00,000 × 100 = 0.01%

सुनने में यह बहुत छोटी लग रही है।

है भी।

बड़ी listed companies में करोड़ों shares हो सकते हैं इसलिए किसी छोटे investor की ownership आमतौर पर बहुत कम होती है।

फिर भी आप उस company के shareholder तो हैं।

यानी अगर आपने किसी company के shares खरीदे हैं तो आप उस company के आंशिक मालिक बन जाते हैं।

यहाँ एक बात समझना जरूरी है।

Company में आपकी ownership और Share की Market Price एक ही चीज नहीं हैं।

मान लीजिए ABC Limited का एक share Stock Market में ₹250 पर चल रहा है।

आपके पास 100 shares हैं।

तो आपके shares की market value होगी:

100 × ₹250 = ₹25,000

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि company में आपकी ownership ₹25,000 ÷ company की कुल assets के बराबर निकाल दी जाएगी।

Ownership इस बात से तय होती है कि company के कुल outstanding shares में से आपके पास कितने shares हैं।

यानी:

आपके Shares ÷ Total Outstanding Shares = आपकी हिस्सेदारी

एक और चीज है जो अक्सर confusion पैदा करती है।

किसी share की Face Value ₹10 हो सकती है और वही share Stock Market में ₹250 या ₹500 पर trade कर सकता है।

ये दोनों अलग चीजें हैं।

Face Value company की share capital से जुड़ा हुआ एक value है, जबकि Market Price वह price है जिस पर share Stock Exchange में उसे खरीदा और बेचा जा रहा है।

इस फर्क को हम आगे आसान example से समझेंगे।

Shareholders को company के कुछ मामलों में voting का अधिकार भी मिल सकता है जैसे directors की appointment या कुछ important resolutions पर vote देना इत्यादि।

आज यह voting electronic तरीके से भी की जा सकती है।

इसलिए Share को केवल Stock Market में ऊपर-नीचे होने वाली price की तरह मत देखिए।

सबसे पहले यह समझिए कि:

Share किसी company में ownership का एक छोटा हिस्सा है।

Share खरीदने पर आप वास्तव में क्या खरीदते हैं?

यह सवाल छोटा है लेकिन बहुत जरूरी भी है।

मान लें किसी company का एक share Stock Market में ₹250 पर चल रहा है।

आपने उसके 100 shares खरीदे।

आपके shares की उस समय market value हुई:

100 × ₹250 = ₹25,000

अब इसका मतलब यह नहीं है कि company ने आपको ₹25,000 की कोई मशीन, building या cash दे दिया।

आपने company की equity ownership का छोटा हिस्सा खरीदा है।

आगे share price ₹300 हो जाए तो आपके 100 shares की market value:

100 × ₹300 = ₹30,000

और अगर price ₹200 रह जाए तो:

100 × ₹200 = ₹20,000

यानी Share की market value ऊपर भी जा सकती है और नीचे भी।

यहाँ कोई fixed return नहीं है। ध्यान रखें |

Company Share क्यों जारी करती है?

देखिये किसी भी business को आगे बढ़ने के लिए पैसे की जरूरत होती है।

नई factory लगानी हो सकती है।

Business expand करना हो सकता है।

Debt कम करना हो सकता है।

या किसी दूसरे काम के लिए capital चाहिए हो सकता है।

Company पैसा कई तरीकों से जुटा सकती है। वह debt ले सकती है, अपने profits का इस्तेमाल कर सकती है या equity capital raise कर सकती है।

Public company shares के जरिए भी capital raise कर सकती है।

यहीं से IPO की बात आती है।

अगर IPO आपके लिए अभी नया शब्द है तो पहले हमारा IPO क्या होता है? वाला लेख पढ़ सकते हैं।

लेकिन यहाँ एक बहुत जरूरी फर्क समझिए।

IPO में Share खरीदना और Stock Market से Share खरीदना एक जैसा नहीं है

मान लीजिए ABC Limited पहली बार public से पैसा जुटा रही है।

तो यहाँ पर Company एक IPO लेकर आती है।

यह Primary Market है।

Fresh issue के मामले में investors से आया पैसा company को capital के रूप में मिल सकता है।

अब company Stock Exchange पर list हो गई।

कुछ महीनों बाद आपने ABC के 100 shares किसी दूसरे investor से Stock Exchange पर खरीदे।

यह Secondary Market है।

इस बार आपके ₹25,000 सीधे ABC Limited के bank account में नहीं गए।

एक existing investor ने shares बेचे और आपने खरीदे।

यानी ownership एक investor से दूसरे investor को transfer हुई।

NSE भी Primary Market और Secondary Market को इसी तरह अलग करता है।

Secondary Market में already issued shares investors के बीच trade होते हैं और company उस सामान्य transaction की direct participant नहीं होती।

अब अगर आपको यह छोटी सी बात समझ में आ गई हो तो Stock Market का काफी बड़ा हिस्सा अपने-आप clear हो जाता है।

1 Share कितने रुपये का होता है?

मैंने देखा कि अक्सर एक सवाल बहुत पूछा जाता है।

“एक Share कितने रुपये का होता है?”

तो जान लें इसका कोई fixed जवाब नहीं है।

एक share ₹20 का भी हो सकता है।

₹250 का भी।

₹2,000 का भी।

और इससे कहीं ज्यादा का भी।

उसकी market price Stock Exchange पर buyers और sellers के बीच होने वाली trading से तयं होती है।

लेकिन अब यहाँ एक और confusion आता है।

कई बार company के share का Face Value ₹10 लिखा होता है लेकिन वही share market में ₹500 पर trade कर रहा होता है।

यह कैसे?

क्योंकि Face Value और Market Price अलग हैं।

Face Value और Market Price में क्या फर्क है?

मान लें ABC Limited के share की:

Face Value = ₹10 है 

लेकिन Stock Exchange पर वही share:

Market Price = ₹250 है 

पर ऐसा क्यों?

देखिये Face Value company की share capital से जुड़ी accounting/legal denomination है।

Market Price वह price है जिस पर उस समय buyers और sellers share को trade कर रहे हैं।

इसलिए Face Value ₹10 होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि share ₹10 में मिलना चाहिए।

और Market Price ₹250 होने का मतलब यह भी नहीं कि उसका Face Value ₹250 हो गया।

दोनों अलग अलग numbers हैं।

यह बात Stock Split, dividend percentage और company के capital structure जैसी चीजें समझते समय आगे काम आती है।

₹50 का Share क्या ₹1,000 वाले Share से सस्ता होता है?

यह जरूरी नहीं।

यही एक बहुत common गलती है।

मान लें दो companies हैं।

Company A

Share Price = ₹50
Outstanding Shares = 100 crore

Market Cap:

₹50 × 100 crore = ₹5,000 crore

Company B

Share Price = ₹1,000
Outstanding Shares = 2 crore

Market Cap:

₹1,000 × 2 crore = ₹2,000 crore

तो देखा आपने, केवल share price देखकर Company A बहुत सस्ती लग रही थी।

₹50 बनाम ₹1,000।

लेकिन पूरी company की market value देखें तो Company A का Market Cap ज्यादा है।

इसलिए केवल यह कहना कि:

“यह share ₹20 का है इसलिए बहुत सस्ता है।”

सही तरीका नहीं है।

ध्यान दें, Share की price अकेले company की valuation नहीं बताती।

Market Capitalization क्या होता है?

Share Market में Market Capitalization को short में Market Cap कहते हैं।

इसका basic formula है:

Market Capitalization = Outstanding Shares × Current Market Price

मान लें ABC Limited के:

Outstanding Shares = 10 लाख हैं और,
Current Market Price = ₹250 है

तब:

10,00,000 × ₹250 = ₹25 crore

ABC Limited का Market Cap ₹25 crore हुआ।

ध्यान रहे कि Market Cap company के listed equity shares की market value दिखाता है।

इसे company के bank account में पड़े cash या उसकी सारी assets की सीधी value न समझें।

आप Market Cap की मदद से shares की संख्या  भी निकाल सकते हैं |

Formula वही है:

Outstanding Shares = Market Capitalization ÷ Market Price per Share

बस इतना ध्यान रखें कि calculation में एक ही समय के compatible numbers होने चाहिए।

Share Price ऊपर नीचे क्यों होती है?

अब सवाल है कि ABC का share आज ₹250 है तो कल ₹255 या ₹240 क्यों हो जाता है?

सबसे सीधी वजह है:

Demand और Supply।

मान लीजिए बहुत सारे लोग ABC के shares खरीदना चाहते हैं लेकिन बेचने वाले कम हैं।

Buyers ज्यादा price offer करना शुरू कर सकते हैं।

Price ऊपर जा सकती है।

अब इसका उल्टा भी हो सकता है।

लेकिन buyers और sellers की राय बदलती क्यों है?

इसके कई कारण हो सकते हैं।

Company का Financial Performance

Revenue कितना है?

Profit बढ़ रहा है या घट रहा है?

Debt कितना है?

Cash Flow कैसा है?

Margins कैसे बदल रहे हैं?

ये सारी चीजें investor expectations को प्रभावित कर सकती हैं।

लेकिन यहाँ यह मानना गलत होगा कि:

Profit बढ़ा = Share Price जरूर बढ़ेगी।

मान लीजिए market को company से 30% profit growth की उम्मीद थी।

अब Actual growth केवल 10% आई।

यहं Profit तो जरूर बढ़ा है।

फिर भी market disappointed हो सकता है क्योंकि प्रॉफिट तो उम्मीद से कम निकला।

और इसलिए यहाँ price गिर सकती है।

Stock Market में price सिर्फ आज के result पर नहीं बल्कि expectations पर भी चलता है।

Company का Future

मान लें….कोई नया product आया।

नई यूनिट लगी।

कोई बड़ा customer मिला।

Competition बढ़ गया।

Management बदल गया।

Regulatory problem आ गई।

इन सभी बातों से future expectations बदल सकती हैं।

लेकिन कोई एक अच्छी news अपने-आप यह guarantee नहीं करती कि share price बढ़ेगी।

Economy और Interest Rates

Inflation, interest rates, economic growth और currency जैसी चीजें भी companies को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकती हैं।

लेकिन इसका कोई simple rule नहीं है कि:

Interest rate बढ़ा तो हर share नीचे ही जाएगा।

देखिये अलग अलग businesses पर असर अलग हो सकता है।

Market Sentiment

कई बार पूरे market में optimism होता है।

तो कई बार डर।

Foreign और domestic institutional investors के flows भी market discussion में बहुत दिखाई देते हैं।

अगर यह topic समझना है तो FII और DII कौन होते हैं? वाला लेख पढ़ सकते हैं।

लेकिन FII buying या selling को अकेले market prediction मान लेना भी सही नहीं है।

Shareholder को क्या मिलता है?

Share खरीदने पर कुछ basic चीजें समझनी जरूरी हैं।

1. Ownership

Equity Share company की ownership का हिस्सा दिखाता है।

जितने shares आपके पास हैं, उतनी proportional equity holding होती है।

2. Voting Rights

सामान्य equity shareholders को applicable company resolutions पर voting rights मिल सकते हैं।

Voting right आमतौर पर paid-up equity holding के proportion से जुड़ा होता है।

इसका मतलब यह नहीं कि आपने 10 shares खरीदे और अगले दिन company के CEO को business चलाने के निर्देश देने लगे।

Listed company में retail shareholder की ownership बहुत छोटी हो सकती है।

लेकिन shareholder rights फिर भी मौजूद होते हैं।

3. Dividend

Company अपने profits या available distributable amounts से dividend declare कर सकती है।

लेकिन dividend guaranteed नहीं होता।

कुछ companies dividend देती हैं कुछ नहीं देतीं।

कुछ किसी साल देती हैं और किसी साल नहीं।

NSE की current investor education भी साफ कहती है कि listed company के लिए हर हाल में dividend देना जरूरी नहीं है और Stock Market return guaranteed नहीं होता।

4. Share Price में बदलाव

आपके shares की market value price के साथ बदलती रहती है।

₹250 का share ₹300 भी हो सकता है।

₹200 भी।

और business बहुत खराब होने की स्थिति में equity की value बहुत ज्यादा गिर सकती है।

Extreme case में लगभग पूरी value खत्म भी हो सकती है।

इसलिए केवल expected profit देखना काफी नहीं है।

Risk भी समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।

Share कितने प्रकार के होते हैं?

आसान और current legal framing में दो मुख्य share-capital categories समझिए:

1. Equity Shares

Stock Market में आम investor जिस “share” की बात करता है, वह आमतौर पर equity share ही होता है।

Equity shareholder company में ownership रखता है।

उसके Applicable voting rights भी हो सकते हैं।

उसे Dividend मिल सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है।

Equity share capital में differential rights वाले shares भी हो सकते हैं।

यानी कुछ equity shares के voting या dividend rights अलग terms पर हो सकते हैं।

2. Preference Shares

Preference Shares में dividend और capital repayment को लेकर equity shares से अलग preferential rights हो सकते हैं।

इनकी terms issue के हिसाब से अलग हो सकती हैं।

Preference shareholder के voting rights भी ordinary equity shareholder जैसे हर मामले में नहीं होते।

Companies Act equity share capital और preference share capital को अलग categories के रूप में define करता है और equity shares में differential rights की व्यवस्था के बारे में भी बताता है।

Beginner के लिए अभी इतना समझना काफी है।

Stock Exchange पर रोज जो shares आप देखते हैं, उनमें आपका मुख्य सामना सामान्य equity shares से ही होगा।

Share की कुछ खास बातें

इसे थोड़ा ठीक तरीके से समझना जरूरी है।

Liquidity

Share Market में liquidity का मतलब होता है कि किसी share में खरीदने और बेचने की activity कितनी आसानी से हो रही है।

लेकिन हर listed share बहुत liquid नहीं होता।

किसी share में रोज लाखों shares trade हो सकते हैं।

किसी दूसरे में बहुत कम।

इसलिए:

Listed = हमेशा highly liquid हो 

ऐसा जरूरी नहीं है।

Trading activity को समझने के लिए हमारा Share Market में Volume क्या होता है? लेख भी पढ़ सकते हैं।

Volatility

Volatility का मतलब है price में उतार-चढ़ाव।

कुछ shares में price comparatively कम बदलती है।

कुछ में बहुत तेजी से बदल सकती है।

लेकिन volatility अपने-आप यह नहीं बताती कि कोई company अच्छी है या खराब।

Ownership

Share खरीदकर आप company की equity ownership का हिस्सा लेते हैं।

यही Share का basic मतलब है।

Risk

Equity में loss हो सकता है।

कई बार काफी बड़ा।

यहाँ एक बात खास तौर पर समझिए:

ज्यादा risk लेने का मतलब ज्यादा return मिलना तय नहीं है।

SEBI भी assured या unrealistic return के promises से सावधान रहने को कहता है।

Share और Stock में क्या फर्क है?

Normal बातचीत में Share और Stock शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल किए जाते हैं।

लेकिन थोड़ा फर्क समझ सकते हैं।

आप कहें:

“मेरे पास ABC Limited के 100 shares हैं।”

यह specific company की units की बात है।

वहीं:

“मैं stocks में invest करता हूँ।”

यह एक broader expression है।

Beginner level पर इस difference को लेकर बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सबसे जरूरी बात ownership का concept समझना है।

Share कैसे खरीदे जाते हैं?

आज shares electronic form में hold किए जाते हैं।

Listed securities खरीदने और बेचने के लिए सामान्यतः investor को PAN, bank account, demat account और SEBI-registered broker के साथ आवश्यक KYC/trading setup की जरूरत पड़ती है।

NSE की updated investor guidance भी यही basic framework बताती है।

यहाँ किसी particular broker का नाम बताने की जरूरत नहीं है।

Broker चुनते समय यह जरूर verify करें कि वह intermediary SEBI registered है।

SEBI भी investors को registered intermediaries के साथ ही deal करने को कहता है।

Demat Account को आप आसान तरीके से shares की electronic holding वाली जगह समझ सकते हैं।

पहले physical share certificates होते थे वहीँ अब listed shares की holding electronic form में होती है।

पहली बार किसी Share को देखते समय क्या समझें?

मान लीजिये आपने किसी company का नाम Google या broker app पर खोला।

तब आपको बहुत सारे numbers दिखाई देंगे।

अब शुरुआत में कम-से-कम इन पाँच चीजों का मतलब समझें।

1. Market Price

अभी share किस price के आसपास trade हो रहा है।

2. Market Capitalization

Outstanding shares की current market value कितनी है।

3. Outstanding Shares

Company के कितने shares currently outstanding हैं।

4. Face Value

Share की accounting/legal denomination क्या है।

5. Trading Volume

किस समय अवधि में कितने shares trade हुए हैं।

लेकिन ध्यान रखें।

इन पाँच numbers को जान लेने भर से यह तय नहीं हो जाता कि कोई share अच्छा है, खराब है, महंगा है या सस्ता।

इसके लिए business, financial statements, valuation, risks और दूसरी कई चीजें समझनी पड़ती हैं।

Price तो सिर्फ शुरुआत है।

कुछ जरूरी सवाल

क्या 1 Share खरीदने पर मैं company का owner बन जाता हूँ?

Equity share किसी company में ownership का एक छोटा हिस्सा represent करता है।

अगर आपके पास बहुत कम shares हैं तो आपकी percentage ownership भी बहुत छोटी होगी।

1 Share कितने रुपये का होता है?

इसकी कोई fixed कीमत नहीं होती।

Market Price अलग-अलग companies में अलग होती है और trading के साथ बदल सकती है।

Face Value ₹10 है तो Share ₹500 में क्यों मिल रहा है?

क्योंकि Face Value और Market Price अलग हैं।

Face Value accounting/share-capital concept है।

₹500 उस समय की market trading price हो सकती है।

₹20 का Share क्या ₹2,000 वाले Share से सस्ता है?

सिर्फ share price देखकर ऐसा नहीं कहा जा सकता।

Outstanding shares और Market Cap के साथ business valuation भी देखनी पड़ती है।

Share खरीदने का पैसा company को जाता है?

Fresh issue/IPO में company capital raise कर सकती है।

लेकिन normal Secondary Market trade में buyer और seller investors होते हैं। Company उस हर transaction की direct participant नहीं होती।

क्या Share से Dividend हमेशा मिलता है?

नहीं।

Company dividend declare कर सकती है, लेकिन dividend guaranteed नहीं है।

क्या Share में पूरा पैसा खत्म हो सकता है?

Equity investment में substantial loss संभव है।

अगर business बहुत खराब हो जाए या company fail हो जाए तो equity value बहुत कम या extreme case में लगभग zero भी हो सकती है।

और अंत में…

Share को समझना मुश्किल नहीं है।

बस शुरुआत सही जगह से होनी चाहिए।

Share का मतलब है company में ownership का एक छोटा हिस्सा।

लेकिन केवल share price देखकर company की value नहीं समझी जा सकती।

Face Value अलग है।

Market Price अलग है।

Market Cap अलग है।

और ₹50 का share सिर्फ ₹50 होने की वजह से सस्ता नहीं हो जाता।

सबसे जरूरी बात यह है कि Share कोई guaranteed-return product नहीं है।

उसकी market value business और market expectations के साथ ऊपर-नीचे होती रहती है।

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नोट: यह लेख केवल financial education के लिए है। NiveshHindi किसी stock को Buy, Sell या Hold करने की recommendation नहीं देता है।

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