Stop Loss क्या है और कैसे लगाएं? Trigger Price, Limit Price और आसान उदाहरण

निवेशकों के लिए Stop Loss एक ऐसा टूल है जो शेयर बाजार में होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।

इसमें कोई शक नहीं कि शेयर बाजार में निवेश करके कम समय में अच्छा पैसा बनाया जा सकता है, पर यह पूरा सच भी नहीं है।

यहाँ पर यह याद रखना जरूरी है कि शेयर बाजार में निवेश करने पर हमेशा जोखिम रहता है और बड़े से बड़े निवेशक भी कई बार नुकसान उठा चुके हैं।

यहीं पर Stop Loss काम आता है। लेकिन क्या केवल स्टॉप लॉस लगा देने से यह तय हो जाता है कि आपका शेयर उसी दाम पर बिक जाएगा?

जी नहीं, और यही बात समझना सबसे जरूरी है।

तो आखिर Stop Loss क्या होता है, इसे कैसे लगाया जाता है और कई बार ट्रिगर होने के बाद भी शेयर क्यों नहीं बिकता?

आइए कुछ आसान उदाहरणों से समझते हैं।

Table of Contents

Stop Loss क्या होता है?

स्टॉप लॉस (SL) एक ऐसा ऑर्डर होता है जो शेयर का भाव एक निश्चित स्तर पर पहुँचने के बाद सक्रिय होता है।

इसके लिए आपको पहले एक कीमत तय करनी होती है जिसे Trigger Price कहा जाता है।

जब शेयर का भाव उस कीमत तक पहुँचता है या उसे पार करता है, तब आपका स्टॉप लॉस ऑर्डर सक्रिय हो जाता है।

मान लें आपने किसी कंपनी का शेयर ₹100 में खरीदा है।

अब आपको लगता है कि अगर यह शेयर ₹90 तक गिर गया तो आगे और नुकसान हो सकता है।

इसलिए आप ₹90 पर अपना Sell Stop Loss Trigger लगा देते हैं।

इसका मतलब है कि जब शेयर का भाव ₹90 या उससे नीचे पहुँच जाएगा, तब आपका स्टॉप लॉस ट्रिगर हो जाएगा और बेचने का ऑर्डर आगे बढ़ेगा।

stop loss kya hai

लेकिन यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है।

अगर आपने ₹90 का स्टॉप लॉस लगाया है तो क्या आपका शेयर ठीक ₹90 पर ही बिकेगा?

जरूरी नहीं है।

ऐसा इसलिए क्योंकि स्टॉप लॉस ट्रिगर होने और वास्तव में शेयर बिक जाने में अंतर होता है।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार का ऑर्डर लगाया है और उस समय बाजार में खरीदार किस भाव पर मौजूद हैं।

इसके बारे में हम आगे उदाहरण के साथ समझेंगे।

शेयर मार्केट में Stop Loss क्यों जरूरी है?

देखिए, किसी स्टॉक में entry करना तो बहुत आसान होता है पर exit करना उतना ही मुश्किल।

आप मेरी इस बात से जरूर इत्तफाक रखते होंगे।

आपने अक्सर ही देखा होगा कि कोई भी स्टॉक खरीदने के बाद ऊपर जाता है, फिर प्रॉफिट बुकिंग होती है और वह आपके buying price से नीचे चला जाता है।

यह एक साधारण परेशानी है जो लगभग सभी के साथ कभी न कभी होती है।

खासकर छोटे समय के ट्रेड में कई बार लोग नुकसान होने के बाद यह सोचकर बैठे रहते हैं कि आज नहीं तो कल भाव वापस आ जाएगा।

और जो ट्रेड कुछ दिनों के लिए लिया था, वह महीनों तक फँसा रह जाता है।

क्यों, ठीक कहा ना मैंने?

स्टॉप लॉस लगाने का एक फायदा यह है कि आप पहले से तय कर सकते हैं कि शेयर का भाव किस स्तर तक गिरने पर बाहर निकलने की कोशिश करनी है।

इससे हर बार बाजार के उतार चढ़ाव को देखकर अपना फैसला बदलने की जरूरत कम पड़ती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्टॉप लॉस आपके नुकसान को पूरी तरह रोक देगा।

कई बार शेयर इतनी तेजी से गिरता है कि आपका ऑर्डर ट्रिगर तो हो जाता है, पर शेयर आपके तय किए हुए दाम पर नहीं बिक पाता।

स्टॉप लॉस कैसे लगाते हैं?

आजकल लगभग सभी प्रमुख ब्रोकर के मोबाइल ऐप में Stop Loss लगाने का विकल्प मिलता है।

अलग अलग ऐप में इसकी स्क्रीन थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन ऑर्डर लगाने का तरीका लगभग एक जैसा ही होता है।

सबसे पहले आपको यह देखना है कि आपने शेयर खरीदकर रखा हुआ है या फिर किसी ऐसे ट्रेड में पहले शेयर बेचा है जिसे बाद में खरीदकर पूरा करना है।

अगर आपके पास खरीदे हुए शेयर हैं तो उन्हें बेचने के लिए Sell Stop Loss लगाया जाता है।

वहीं अगर आपने किसी शेयर में Short Position बनाई है तो उसे बंद करने के लिए Buy Stop Loss लगाया जाता है।

इसके बाद आपको शेयरों की संख्या यानी Quantity भरनी होती है।

अब Order Type में SL Limit या जहाँ यह सुविधा उपलब्ध हो, SL Market का विकल्प मिलेगा।

यहाँ आपको Trigger Price भरना होगा। अगर आपने SL Limit चुना है तो उसके साथ Limit Price भी देना होगा।

अब सवाल है कि ये Trigger Price और Limit Price क्या होते हैं और दोनों में क्या अंतर है?

इसे भी हम आगे एक उदाहरण से समझेंगे।

फिलहाल इतना ध्यान रखें कि ऑर्डर भरकर Submit का बटन दबा देने से ही आपका काम पूरा नहीं होता।

इसके बाद Order Book में जाकर देखिए कि आपका ऑर्डर स्वीकार हुआ है या नहीं और उसका Status क्या दिखा रहा है।

जिन लोगों ने पहले कभी Stop Loss नहीं लगाया है, उनके लिए नीचे Sell और Buy Stop Loss के दो काल्पनिक उदाहरण दिए गए हैं, जिनसे आपको पूरा तरीका आसानी से समझ में आ जाएगा।

Sell Stop Loss का उदाहरण

चलिए पहले Sell Stop Loss को एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लें आपने XYZ Ltd कंपनी के 100 शेयर ₹100 प्रति शेयर के भाव पर खरीदे हैं।

अब आपको लगता है कि अगर इस शेयर का भाव ₹90 तक गिर गया तो आगे नुकसान बढ़ सकता है।

इसलिए आपने ₹90 का Stop Loss लगाने का फैसला किया।

यहाँ हम Stop Loss Limit Order का उदाहरण ले रहे हैं जिसमें आपको दो कीमतें देनी होती हैं।

पहली Trigger Price और दूसरी Limit Price।

नीचे दिए गए ऑर्डर को देखिए।

sell stop loss order

Sell Stop Loss Order कैसे भरें?

ऑर्डर में क्या भरना हैउदाहरणइसका मतलब
Order SideSELLखरीदे हुए शेयर बेचने हैं
Order TypeSL LimitTrigger होने के बाद Limit Order सक्रिय होगा
Quantity100कुल 100 शेयर बेचने हैं
Trigger Price₹90.00इस भाव या इससे नीचे पहुँचने पर ऑर्डर ट्रिगर होगा
Limit Price₹89.50इससे कम भाव पर शेयर नहीं बिकेंगे
ValidityDAYऑर्डर उसी कारोबारी दिन तक मान्य रहेगा

अब यहाँ आपने Trigger Price ₹90 रखा है और Limit Price ₹89.50 दिया है।

इसका मतलब है कि जब शेयर का भाव ₹90 या इससे नीचे पहुँचेगा, तब आपका Sell Limit Order सक्रिय हो जाएगा।

लेकिन क्या इसका मतलब है कि आपके सभी 100 शेयर ₹90 पर ही बिक जाएँगे?

जी नहीं।

मान लें उस समय बाजार में ₹89.80 पर खरीदार मौजूद हैं। तब आपके शेयर ₹89.80 या उससे बेहतर भाव पर बिक सकते हैं।

यह भी संभव है कि केवल कुछ शेयर ही बिकें।

लेकिन अगर शेयर का भाव अचानक ₹88 पर पहुँच जाए और ₹89.50 या उससे अधिक भाव पर कोई खरीदार न मिले, तो आपका ऑर्डर पूरा नहीं होगा।

इसलिए यहाँ ध्यान रखें कि Stop Loss Trigger होने का मतलब शेयर का बिक जाना नहीं है।

Buy Stop Loss का उदाहरण

अब चलिए Buy Stop Loss का उदाहरण देखते हैं।

मान लें आपने किसी अनुमति प्राप्त Intraday Trade में एक शेयर को ₹100 पर Short Sell किया और ऐसे 100 शेयर बेचे।

अब इस ट्रेड को पूरा करने के लिए आपको बाद में उतने ही शेयर वापस खरीदने होंगे।

अगर शेयर का भाव ₹100 से नीचे जाता है तो आपको फायदा हो सकता है। लेकिन अगर भाव नीचे जाने के बजाय ऊपर बढ़ने लगे तो नुकसान होगा।

इसी स्थिति में Buy Stop Loss का उपयोग किया जाता है।

मान लें आपने ₹110 का Trigger Price और ₹110.50 का Limit Price रखा है।

buy stop loss limit

Buy Stop Loss Order कैसे भरें?

ऑर्डर में क्या भरना हैउदाहरणइसका मतलब
Order SideBUYपहले बेचे हुए शेयर वापस खरीदने हैं
Order TypeSL LimitTrigger होने के बाद Limit Order सक्रिय होगा
Quantity100कुल 100 शेयर खरीदने हैं
Trigger Price₹110.00इस भाव या इससे ऊपर पहुँचने पर ऑर्डर ट्रिगर होगा
Limit Price₹110.50इससे अधिक भाव पर शेयर नहीं खरीदे जाएँगे
ValidityDAYऑर्डर उसी कारोबारी दिन तक मान्य रहेगा

अब मान लें शेयर का भाव बढ़ते हुए ₹110 तक पहुँच गया।

इस स्थिति में आपका Buy Stop Loss ट्रिगर हो जाएगा और ₹110.50 का Buy Limit Order सक्रिय हो जाएगा।

अगर बाजार में ₹110.20 पर बेचने वाले मौजूद हैं तो आपका ऑर्डर उस भाव पर पूरा हो सकता है।

लेकिन अगर शेयर का भाव अचानक ₹112 तक पहुँच गया और ₹110.50 या उससे कम पर कोई बेचने वाला नहीं है, तो क्या होगा?

इस स्थिति में आपका Buy Order पूरा नहीं होगा और नुकसान आगे भी बढ़ सकता है।

तो अब आप समझ गए होंगे कि Sell Stop Loss में Limit Price आमतौर पर Trigger Price के बराबर या उससे नीचे रखी जाती है, जबकि Buy Stop Loss में यह Trigger Price के बराबर या उससे ऊपर होती है।

एक बात और ध्यान रखें। यहाँ Short Selling का उदाहरण केवल Buy Stop Loss की कार्यप्रणाली समझाने के लिए दिया गया है।

भारत में सामान्य Equity Delivery में बिना शेयर रखे उन्हें बेचकर अगले दिन तक पोजीशन बनाए रखना संभव नहीं है, जब तक संबंधित डिलीवरी की व्यवस्था नियमों के अनुसार न हो।

Trigger Price और Limit Price में क्या अंतर है?

Stop Loss लगाते समय सबसे ज्यादा उलझन Trigger Price और Limit Price को लेकर होती है।

कई लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने ₹90 का Trigger Price दिया है तो उनका शेयर ₹90 पर ही बिक जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है।

देखिए, Trigger Price वह कीमत है जहाँ पहुँचने पर आपका स्टॉप लॉस ऑर्डर सक्रिय हो जाता है।

वहीं Limit Price वह कीमत है जिससे कम पर आप अपना शेयर बेचना नहीं चाहते या जिससे अधिक कीमत पर खरीदना नहीं चाहते।

अब इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लें आपने कोई शेयर ₹100 में खरीदा और उसे बेचने के लिए ₹90 का Stop Loss Trigger लगाया।

इसके साथ Limit Price ₹89.50 रखी।

अब जैसे ही शेयर का भाव ₹90 या उससे नीचे पहुँचेगा, आपका स्टॉप लॉस ट्रिगर होगा और ₹89.50 का Limit Sell Order बाजार में चला जाएगा।

इसका मतलब है कि आपका शेयर ₹89.50 या उससे अधिक कीमत पर बिक सकता है।

मान लें बाजार में ₹90.10 पर खरीदार मौजूद हैं तो उस कीमत पर भी सौदा हो सकता है।

लेकिन अगर खरीदार केवल ₹89.40 पर हैं तो आपका शेयर नहीं बिकेगा क्योंकि आपने बेचने की न्यूनतम कीमत ₹89.50 रखी है।

इसी तरह Buy Stop Loss में अगर Trigger ₹110 और Limit ₹110.50 है तो आपका खरीदने का ऑर्डर ₹110.50 या उससे कम कीमत पर ही पूरा हो सकता है।

ऑर्डरTrigger PriceLimit Priceक्या मतलब है?
Sell Stop Loss₹90₹89.50₹89.50 से कम पर शेयर नहीं बिकेगा
Buy Stop Loss₹110₹110.50₹110.50 से अधिक पर शेयर नहीं खरीदा जाएगा

यहाँ एक बात और समझ लीजिए कि Stop Loss Limit में दो अलग ऑर्डर नहीं होते बल्कि एक ही ऑर्डर में Trigger और Limit की दो कीमतें दी जाती हैं।

stop loss trigger price

Stop Loss ट्रिगर होने के बाद क्या होता है?

अब आप पूछ सकते हैं कि अगर स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया तो क्या ऑर्डर पूरा होना तय है?

जी नहीं।

ट्रिगर होने के बाद भी आपका ऑर्डर पूरा हो सकता है, कुछ शेयरों का सौदा हो सकता है या फिर पूरा ऑर्डर Pending रह सकता है।

उदाहरण के लिए मान लें आपने 100 शेयर बेचने का ऑर्डर दिया लेकिन आपकी Limit Price पर केवल 40 शेयरों के खरीदार मिले।

तब आपके 40 शेयर बिक सकते हैं और बाकी 60 शेयरों का ऑर्डर Pending रह सकता है।

ऑर्डर की स्थितिइसका क्या मतलब है?
Trigger Pendingस्टॉप लॉस अभी ट्रिगर नहीं हुआ है
Open या Pendingऑर्डर सक्रिय है लेकिन पूरा नहीं हुआ
Partially Filledकुछ शेयरों का सौदा हुआ है, बाकी बचे हैं
Completedपूरे ऑर्डर का सौदा हो चुका है
Rejectedऑर्डर स्वीकार नहीं हुआ या बाद में अस्वीकार कर दिया गया

इसलिए केवल Trigger होने का मैसेज देखकर यह मत मान लीजिए कि आपके सभी शेयर बिक चुके हैं। ऑर्डर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए Order Book देखना जरूरी है।

Stop Loss Market और Stop Loss Limit में क्या अंतर है?

Stop Loss को आमतौर पर दो तरीकों से लगाया जा सकता है। पहला Stop Loss Market और दूसरा Stop Loss Limit।

आइए दोनों के बीच का अंतर आसान उदाहरणों से समझते हैं।

1. Stop Loss Market Order

Stop Loss Market एक ऐसा ऑर्डर है जो ट्रिगर होने के बाद मार्केट ऑर्डर में बदल जाता है।

इसमें आप शेयर को किस कीमत पर बेचना या खरीदना चाहते हैं, उसकी अंतिम कीमत पहले से तय नहीं करते।

मान लें आपने किसी शेयर को ₹100 में खरीदा और ₹90 का Stop Loss Market Order लगाया।

अब बाजार में अचानक भारी गिरावट आ गई और आपका स्टॉप लॉस ट्रिगर हुआ। लेकिन उस समय खरीदार ₹90 की जगह ₹87 पर मौजूद हैं।

तो ऐसी स्थिति में आपका शेयर ₹87 पर भी बिक सकता है।

इसका मतलब यह हुआ कि आपने स्टॉप लॉस तो ₹90 पर लगाया था लेकिन वास्तविक नुकसान उससे अधिक हो गया।

यहाँ आपको समझना है कि Stop Loss Market में सौदा पूरा होने की संभावना को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन किस कीमत पर सौदा होगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती। कुछ परिस्थितियों में ऑर्डर पूरा भी नहीं हो पाता।

एक जरूरी बात। NSE में Index Options और Stock Options के लिए Stop Loss Market Order उपलब्ध नहीं है।

ऐसे कॉन्ट्रैक्ट में Stop Loss Limit के नियम समझना जरूरी है।

2. Stop Loss Limit Order

अब बात करते हैं Stop Loss Limit की।

इसमें आप Trigger Price के साथ एक Limit Price भी तय करते हैं। इसका फायदा यह है कि शेयर बेचने की न्यूनतम या खरीदने की अधिकतम कीमत आपके नियंत्रण में रहती है।

लेकिन इसमें एक परेशानी भी है।

मान लें आपने ₹100 में शेयर खरीदा और ₹90 का Stop Loss Trigger लगाया। इसके साथ Limit Price रखी ₹89.50।

अब अचानक कंपनी से जुड़ी कोई खराब खबर आ गई और शेयर का भाव तेजी से गिरकर ₹86 पर पहुँच गया।

इस स्थिति में आपका स्टॉप लॉस ट्रिगर तो हो सकता है लेकिन अगर ₹89.50 या उससे अधिक कीमत पर खरीदार नहीं मिले तो आपका शेयर नहीं बिकेगा।

आपका ऑर्डर Pending रह सकता है और शेयर का भाव आगे भी गिर सकता है।

तो देखा आपने, दोनों प्रकार के स्टॉप लॉस में अंतर है।

Stop Loss MarketStop Loss Limit
केवल Trigger Price देना होता हैTrigger और Limit दोनों कीमतें देनी होती हैं
ट्रिगर होने पर मार्केट ऑर्डर बनता हैट्रिगर होने पर लिमिट ऑर्डर सक्रिय होता है
वास्तविक सौदे की कीमत तय नहीं होतीखरीदने या बेचने की कीमत पर सीमा रहती है
जहाँ उपलब्ध हो, सौदा पूरा होने की संभावना अधिक हो सकती हैकीमत सीमा से बाहर होने पर ऑर्डर Pending रह सकता है

इसलिए यह समझना जरूरी है कि स्टॉप लॉस आपके नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन हर परिस्थिति में नुकसान को पहले से तय रकम तक सीमित नहीं कर सकता।

Stop Loss में ₹90.25 जैसे दशमलव वाले दाम लगा सकते हैं?

बिल्कुल लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उस शेयर का Tick Size देखना जरूरी है।

ऐसा मानना कि Stop Loss हमेशा ₹90 या ₹100 जैसे पूरे रुपये में ही लगाना चाहिए, सही नहीं है।

अब सवाल है कि यह Tick Size क्या होता है?

Tick Size का मतलब है कि किसी शेयर की कीमत में कम से कम कितने पैसे का अंतर हो सकता है।

मान लें किसी शेयर का Tick Size ₹0.05 है तो आप ₹100.05 या ₹100.10 जैसे दाम पर ऑर्डर लगा सकते हैं, लेकिन ₹100.07 पर नहीं।

NSE ने 13 मार्च 2025 को शेयरों के Tick Size में बदलाव का सर्कुलर जारी किया था, जो 15 अप्रैल 2025 से लागू हुआ।

कुछ तय Cash Market Equity Groups के लिए नीचे दी गई तालिका लागू होती है।

इसमें ETF शामिल नहीं हैं।

NSE में शेयर के संदर्भ मूल्य की श्रेणीTick Size
₹250 से कम₹0.01
₹250 से ₹1,000 तक₹0.05
₹1,000 से अधिक और ₹5,000 तक₹0.10
₹5,000 से अधिक और ₹10,000 तक₹0.50
₹10,000 से अधिक और ₹20,000 तक₹1.00
₹20,000 से अधिक₹5.00

यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है कि यह तालिका हर शेयर, ETF या Futures और Options पर लागू नहीं होती।

उदाहरण के लिए NSE में Index Options का Tick Size ₹0.05 है।

वहीं Stock Options में संबंधित शेयर का भाव ₹250 से कम होने पर Tick Size ₹0.01 और ₹250 या उससे अधिक होने पर ₹0.05 होता है।

Stock Futures में भी संबंधित शेयर का Tick Size लागू होता है।

इसलिए ऑर्डर लगाने से पहले अपने ब्रोकर के ऐप या NSE और BSE की वेबसाइट पर उस शेयर या कॉन्ट्रैक्ट का Tick Size जरूर देख लें।

एक्सचेंज समय समय पर इसकी समीक्षा भी करता है।

Stop Loss Trigger हुआ, फिर भी शेयर क्यों नहीं बिका?

जरा सोचिए, आपने ₹90 का Stop Loss Trigger लगाया और कुछ समय बाद ऐप में दिखाई भी दे रहा है कि आपका ऑर्डर ट्रिगर हो चुका है।

लेकिन जब आपने Holdings में जाकर देखा तो सारे शेयर अभी भी वहीं हैं।

आखिर ऐसा क्यों?

देखिए, Stop Loss Trigger होने का मतलब केवल इतना है कि आपका ऑर्डर सक्रिय हो गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बिक भी गए हैं।

मान लें आपने ₹90 का Trigger Price और ₹89.50 का Sell Limit Price दिया है।

अब आपका ऑर्डर तो ₹90 पर ट्रिगर हो जाएगा, लेकिन उसे पूरा होने के लिए ₹89.50 या उससे बेहतर भाव पर खरीदार भी मिलने चाहिए।

अगर उस समय इतने दाम पर खरीदार ही नहीं हैं तो आपका ऑर्डर खुला रह सकता है।

यही बात Buy Stop Loss Order पर भी लागू होती है।

अगर शेयर अगले दिन बहुत नीचे खुले तो क्या होगा?

मान लें कोई शेयर कल ₹95 पर बंद हुआ था और आपने अपने ब्रोकर की GTT जैसी सुविधा में ₹90 का Trigger और ₹89.50 की Sell Limit लगा रखी है।

अब रात में कंपनी से जुड़ी कोई खराब खबर आ गई और अगली सुबह शेयर सीधे ₹82 पर खुला।

इस स्थिति में ₹90 का Trigger पार होने से ऑर्डर सक्रिय हो सकता है, लेकिन ₹89.50 की Limit पर शेयर बिकना मुश्किल हो सकता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि बाजार में खरीदार ₹82 के आसपास हो सकते हैं जबकि आप अपना शेयर ₹89.50 से नीचे बेचना ही नहीं चाहते।

अगर शेयर Lower Circuit में फँस गया और खरीदार नहीं मिले तो परेशानी और बढ़ सकती है।

इसलिए यहाँ आपका Stop Loss Trigger तो हो सकता है, लेकिन शेयर बिकेगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

stop loss gap down

इसलिए कभी भी केवल Stop Loss Trigger होने का मैसेज देखकर यह न मान लें कि आपके शेयर बिक चुके हैं। इसके लिए Order Book में जाकर वास्तविक स्थिति देखना जरूरी है।

क्या Stop Loss में आधे शेयर भी बिक सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल। इसे Partial Fill कहा जाता है।

मान लें आपने किसी कंपनी के 100 शेयर बेचने के लिए Stop Loss Limit Order लगाया है।

अब आपका ऑर्डर ट्रिगर तो हो गया, लेकिन उस समय आपकी Limit Price या उससे बेहतर भाव पर केवल 40 शेयरों के खरीदार मौजूद हैं।

इस स्थिति में आपके 40 शेयर बिक सकते हैं और बाकी 60 शेयरों का ऑर्डर खुला रह सकता है।

अब सवाल है कि बाकी शेयरों का क्या होगा?

अगर बाद में खरीदार मिल गए तो बाकी शेयर भी बिक सकते हैं, लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है।

अगर आपका ऑर्डर DAY Validity वाला है और बाजार बंद होने तक बाकी शेयर नहीं बिके तो शेष ऑर्डर रद्द हो जाएगा।

इसलिए Order Book में केवल Completed या Triggered लिखा हुआ देखने के बजाय यह भी जाँचें कि कितने शेयर वास्तव में बिके हैं और कितने अभी बाकी हैं।

Stop Loss Order Reject क्यों हो सकता है?

कई बार आपका Stop Loss Order स्वीकार ही नहीं होता या फिर Trigger होने के बाद भी Reject हो जाता है।

इसके कई कारण हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए अगर आपने किसी शेयर के Tick Size के अनुसार सही कीमत नहीं भरी है तो आपका ऑर्डर शुरू में ही Reject हो सकता है।

इसी तरह गलत Trigger Price, Limit Price, पर्याप्त Funds या Margin का न होना और एक्सचेंज की Price Band से जुड़ी पाबंदियाँ भी इसकी वजह बन सकती हैं।

Futures और Options में एक और बात ध्यान रखने वाली है।

NSE में Limit Price Protection के नियम लागू होते हैं। इसके तहत कुछ Stop Loss Limit Orders को Trigger होने के बाद भी जाँचा जाता है।

अगर उनकी Limit Price तय सीमा से बाहर हुई तो ऑर्डर Reject हो सकता है।

एक और परेशानी तब आती है जब आपने अपने पुराने Delivery Shares बेचने के लिए GTT लगाया हो।

कुछ ब्रोकर के यहाँ ऐसे Sell Order के लिए CDSL TPIN से शेयरों को अधिकृत करना पड़ सकता है। हालाँकि DDPI या दूसरी मान्य व्यवस्था होने पर प्रक्रिया अलग हो सकती है।

इसलिए अगर आपका ऑर्डर Reject हो गया है तो सबसे पहले Order Book में उसका कारण देखें।

बिना कारण समझे बार बार वही ऑर्डर डालने से भी परेशानी हो सकती है।

क्या Stop Loss अगले दिन भी लगा रहता है?

यह सवाल बहुत से नए निवेशकों को परेशान करता है।

मान लें आपने आज किसी शेयर में Stop Loss लगाया, लेकिन पूरे दिन शेयर उस कीमत तक नहीं पहुँचा।

तो क्या आपका Stop Loss कल भी अपने आप लगा रहेगा?

अगर आपने सामान्य DAY Stop Loss Order दिया है तो इसका जवाब है, नहीं।

ऐसा ऑर्डर उसी कारोबारी दिन के लिए होता है।

अगर दिन समाप्त होने तक वह पूरा नहीं हुआ तो बचा हुआ ऑर्डर रद्द हो जाता है।

इसका मतलब यह है कि अगली सुबह आपके शेयरों पर वही Stop Loss अपने आप लागू नहीं रहेगा।

लेकिन कुछ ब्रोकर GTT यानी Good Till Triggered की सुविधा भी देते हैं।

GTT क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

GTT की मदद से आप किसी शेयर को खरीदने या बेचने की एक शर्त आगे के दिनों के लिए रख सकते हैं।

मान लें आपने ₹100 में कोई शेयर खरीदा और उसकी कीमत ₹90 तक गिरने पर बेचने की शर्त लगाई।

अगर आपके ब्रोकर के यहाँ GTT उपलब्ध है तो यह शर्त निर्धारित अवधि तक बनी रह सकती है।

लेकिन यहाँ भी एक बात समझना जरूरी है।

GTT में आपका ऑर्डर हमेशा एक्सचेंज पर खुला नहीं रहता। आम तौर पर आपकी शर्त ब्रोकर के सिस्टम में रहती है और Trigger होने पर एक्सचेंज को नया ऑर्डर भेजा जाता है।

इसलिए GTT Trigger होने के बाद भी ऑर्डर Reject हो सकता है या शेयर बिकने से रह सकते हैं।

अगर एक बार GTT Trigger हो गया और उससे भेजा गया ऑर्डर पूरा नहीं हुआ तो उसे दोबारा लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है। इसकी अवधि और बाकी शर्तें ब्रोकर के अनुसार अलग होती हैं।

एक बात और ध्यान रखें।

Bonus, Stock Split या किसी दूसरे Corporate Action के बाद आपके पुराने GTT का क्या होगा, यह भी जरूर देखिए।

कुछ ब्रोकर ऐसी स्थिति में पुराने GTT को रद्द कर देते हैं।

इसी तरह अगर आपने अपने शेयर पहले ही बेच दिए हैं तो पुराना Sell GTT भी जाँचकर रद्द कर दें, ताकि बाद में अनावश्यक ऑर्डर न भेजा जाए।

NSE के Closing Auction Session में शामिल शेयरों के लिए उस विशेष सत्र में Stop Loss Order की अनुमति भी नहीं है।

इसलिए केवल Stop Loss या GTT लगा देने से आपका काम पूरा नहीं हो जाता। समय समय पर Order Book और Holdings की स्थिति भी देखना जरूरी है।

GTT की शर्तों को समझने के लिए Zerodha का आधिकारिक विवरण भी उपयोगी है। ध्यान दें कि दूसरे ब्रोकर की शर्तें अलग हो सकती हैं।

अगर आप चार्ट पर पुराने भावों के आधार पर Support और Resistance को समझना चाहते हैं तो हमारा लेख Support और Resistance क्या हैं? भी पढ़ सकते हैं।

Trailing Stop Loss कैसे काम करता है?

ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एक ऐसा तरीका है जिसमें शेयर का भाव आपकी दिशा में बढ़ने पर Stop Loss का स्तर भी उसके पीछे पीछे बढ़ता रहता है।

लेकिन अगर शेयर वापस गिरने लगे तो स्टॉप लॉस का स्तर अपने आप नीचे नहीं आता।

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने किसी शेयर को ₹100 में खरीदा और उसके नीचे 10% का Trailing Stop Loss लगा दिया।

इसका मतलब है कि शुरू में आपका स्टॉप लॉस ₹90 पर रहेगा।

अब अगर शेयर का भाव बढ़कर ₹150 हो जाता है तो 10% नीचे के हिसाब से स्टॉप लॉस भी बढ़कर ₹135 हो जाएगा।

लेकिन यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है।

अगर अब शेयर का भाव ₹150 से गिरकर ₹140 या ₹125 तक आ जाए तो क्या स्टॉप लॉस भी वापस नीचे आ जाएगा?

जी नहीं। वह ₹135 पर ही बना रहेगा। इस तरह शेयर के दाम बढ़ने पर स्टॉप लॉस ऊपर जा सकता है, लेकिन गिरावट आने पर वापस नीचे नहीं आता।

trailing stop loss

यहाँ हमने प्रतिशत के आधार पर ट्रेलिंग का उदाहरण लिया है।

लेकिन हर ब्रोकर में यह सुविधा एक जैसी नहीं होती।

कहीं स्टॉप लॉस एक निश्चित रुपये के अंतर से आगे बढ़ता है तो कहीं आपको उसे खुद बदलना पड़ सकता है।

कुछ ब्रोकर GTT के साथ Trailing Stop Loss की सुविधा भी देते हैं।

इसलिए अपने ब्रोकर के ऐप में पहले यह देख लें कि यह सुविधा कैसे काम करती है।

और हाँ, Trailing Stop Loss ट्रिगर होने के बाद भी शेयर उसी दाम पर बिकेगा, इसकी गारंटी नहीं होती।

स्टॉप लॉस लगाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

कोई भी ट्रेड लेने से पहले ही आप अपना Exit Plan बनाकर रखें यानी यह तय कर लें कि ट्रेड खराब होने की स्थिति में कैसे बाहर निकलना है।

आप यहाँ पर यह समझ लें कि किसी ट्रेड में नुकसान को सीमित करने की कोई योजना न रखना कुछ ऐसा ही है जैसे आप बिना हेलमेट के बाइक चला रहे हों।

लेकिन हेलमेट पहन लेने से दुर्घटना होना बंद नहीं हो जाता।

ठीक इसी तरह Stop Loss भी आपके नुकसान को हमेशा एक निश्चित रकम पर नहीं रोक सकता।

अब सवाल है कि स्टॉप लॉस किस स्तर पर रखना चाहिए?

कई लोग चार्ट पर Support या Resistance देखकर उसी कीमत पर अपना स्टॉप लॉस लगा देते हैं। लेकिन ध्यान दें कि Support और Resistance कोई पक्की दीवार नहीं हैं जहाँ पहुँचकर शेयर का भाव हर बार रुक ही जाएगा।

इस विषय को और अच्छी तरह समझने के लिए आप हमारा Support और Resistance वाला लेख पढ़ सकते हैं।

इसी तरह अगर आपको चार्ट पर बनने वाली अलग अलग Candles को समझने में परेशानी हो रही है तो पहले Candlestick Chart क्या है पढ़ें।

एक बात और ध्यान रखें कि अगर स्टॉप लॉस बहुत पास रखा गया है तो शेयर के सामान्य उतार चढ़ाव में भी वह बार बार ट्रिगर हो सकता है।

वहीं अगर स्टॉप लॉस बहुत दूर रखा है तो नुकसान भी अधिक हो सकता है।

इसलिए केवल प्रतिशत देखने के बजाय यह भी समझना जरूरी है कि आपने कितने शेयर खरीदे हैं, आपकी कुल पूँजी कितनी है और भाव गिरने पर वास्तव में कितना नुकसान हो सकता है।

Stop Loss से जुड़े कुछ आम सवाल

क्या Stop Loss लगाने के बाद लगातार बाजार देखने की जरूरत नहीं होती?

ऐसा मानना सही नहीं होगा।

कई बार बाजार अचानक गिर जाता है या फिर आपका स्टॉप लॉस ट्रिगर होने के बाद भी ऑर्डर पूरा नहीं होता।

ऐसा भी हो सकता है कि आपके कुछ शेयर बिक गए हों और बाकी अभी भी Pending हों।

इसलिए समय समय पर Order Book में जाकर अपने ऑर्डर का Status देखना जरूरी है।

Trigger Price छूने के बाद भी Stop Loss ट्रिगर क्यों नहीं हुआ?

यह सवाल कई लोगों के मन में आता है।

मान लीजिए आपने किसी शेयर का GTT स्टॉप लॉस ₹100 पर रखा था। बाद में चार्ट पर ₹100 का भाव दिखाई दिया, लेकिन आपका GTT ट्रिगर नहीं हुआ।

ऐसा कुछ ब्रोकर के सिस्टम में इसलिए हो सकता है क्योंकि GTT उनके द्वारा दर्ज किए गए बाजार के भावों पर निर्भर करता है।

बाजार में हुए हर सौदे का भाव उनके सिस्टम में दर्ज हो, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए चार्ट पर दिखाई देने वाले भाव और GTT के रिकॉर्ड में अंतर हो सकता है।

ऐसी स्थिति में अपने ब्रोकर की Order History और GTT Status जरूर जाँचें।

क्या Stop Loss केवल नुकसान में ही लगाया जाता है?

जी नहीं।

मान लीजिए आपने किसी शेयर को ₹100 में खरीदा और बाद में उसका भाव ₹150 हो गया।

अब अगर आप बाहर निकलने का स्तर ऊपर करते हैं तो इसका उद्देश्य केवल नुकसान कम करना नहीं, बल्कि पहले से बने लाभ का कुछ हिस्सा बचाने की कोशिश करना भी हो सकता है।

Trailing Stop Loss इसी तरह काम करता है।

हालाँकि इससे भी लाभ की कोई गारंटी नहीं होती।

Stop Loss ट्रिगर होने के बाद क्या GTT अपने आप दोबारा लग जाएगा?

जरूरी नहीं है।

कई ब्रोकर में GTT केवल एक बार ट्रिगर होता है। इसके बाद अगर आपका ऑर्डर पूरा नहीं हुआ तो भी पुराना GTT समाप्त हो सकता है।

इसलिए अगर आपका GTT ट्रिगर हुआ है लेकिन शेयर नहीं बिका तो यह मानकर न चलें कि वही स्टॉप लॉस अगले दिन भी काम करेगा।

पहले ऑर्डर की स्थिति देखें और अपने ब्रोकर के नियमों के अनुसार समझें कि नया GTT लगाने की जरूरत है या नहीं।

और अंत में…

Stop Loss को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि इसे केवल ₹90 या ₹100 की एक लाइन न समझें।

Trigger Price, Limit Price और वास्तव में शेयर किस दाम पर बिका, इन तीनों में अंतर होता है।

आपने स्टॉप लॉस लगा दिया, इसका मतलब यह नहीं कि शेयर बिक ही गया।

इसलिए Order Book में जाकर जरूर देखिए कि आपका ऑर्डर Pending है, कुछ शेयर बिके हैं, पूरा हो चुका है या फिर Reject हो गया है।

उम्मीद है कि अब आपको Stop Loss लगाने और उसके काम करने का तरीका पहले से अधिक साफ हो गया होगा।

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि Stop Loss ट्रिगर हुआ हो लेकिन शेयर नहीं बिका हो? या फिर स्टॉप लॉस लगाने के बाद भी अधिक नुकसान उठाना पड़ा हो?

अपना अनुभव हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

ध्यान दें: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शेयर बाजार और Stop Loss को समझाने के लिए है और किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है। यहाँ दिए गए सभी उदाहरण काल्पनिक हैं। केवल स्टॉप लॉस लगाने से नुकसान पूरी तरह रुकने की गारंटी नहीं होती और वास्तविक सौदा आपके तय किए गए भाव से अलग कीमत पर भी हो सकता है। इसलिए कोई भी ऑर्डर लगाने से पहले अपने ब्रोकर के नियम और उससे जुड़े जोखिम जरूर समझ लें।

संदर्भ (References):

  • National Stock Exchange of India (NSE). (2025). Trading Rules, Order Types and Tick Size. NSE India.

  • BSE Limited. (n.d.). Equity Market Trading and Order Execution. BSE India.

  • Securities and Exchange Board of India (SEBI). (n.d.). Investor Education and Securities Market Risk Management. SEBI.

  • Zerodha. (n.d.). Stop Loss Orders, GTT and Trailing Stop Loss. Zerodha Support.

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6 thoughts on “Stop Loss क्या है और कैसे लगाएं? Trigger Price, Limit Price और आसान उदाहरण”

  1. हेलो sir

    क्या आप हमारी site के साथ backlink exchange करना के चाहेंगे इसके द्वारा हमारी और आपकी site की doman authority बढ़ेगी और हम दोनो के sites की google ranking भी improve हो जाएगी ।

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    1. अनुपम श्रीवास्तव

      धन्यवाद | ये Google’s Webmaster Guidelines के विपरीत है इसलिए हो सके तो आप भी इससे बचे |

      1. हाँ ये सही नहीं है | लेकिन ये उनके लिए सही नहीं है जो एक ही वेबसाइट से 1000 – 2000 लिंक एक्सचेंज करते है | लेकिन यदि आप 1 या 2 लिंक एक्सचेंज करेंगे तो किसी को कोई समस्या नहीं होगी | ऐसा मेरा मानना है | Finoहिंदी

        1. अनुपम श्रीवास्तव

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