IPO क्या है और कैसे Apply करें? Allotment, UPI Mandate और Status Check

आईपीओ के बारे में आपने जरूर सुना होगा अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं।

वैसे भी जिस तरह से जोमैटो, एलआईसी और जियो इत्यादि के आईपीओ को प्रचारित किया गया था, उस तरह से देखा जाए तो शेयर बाजार से दूर रहने वाले लोगों ने भी इनका नाम जरूर सुना होगा।

कई IPO की लिस्टिंग पर निवेशकों को अच्छा फायदा हुआ तो कुछ में पहले ही दिन नुकसान भी उठाना पड़ा।

लेकिन आईपीओ की चर्चा शुरू होते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही रहता है कि इसमें आवेदन कैसे करें और पता कैसे चलेगा कि शेयर मिले भी हैं या नहीं।

जैसा हमने अपने पिछले लेख में बताया था कि जिस तरह से नए म्यूचुअल फंड के लिए एनएफओ होता है, उसी तरह किसी कंपनी के शेयर पहली बार आम निवेशकों के सामने IPO के जरिए आ सकते हैं।

हालांकि दोनों की प्रक्रिया और नियम अलग हैं।

चलिए पहले यह समझते हैं कि IPO क्या होता है?

फिर बात करेंगे आवेदन, UPI mandate, allotment और उस पैसे की जो कई बार आवेदन के बाद बैंक खाते में ब्लॉक दिखाई देता रहता है।

Table of Contents

आईपीओ क्या होता है? IPO का मतलब

जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम लोगों के सामने बिक्री के लिए लाती है तो उसे IPO यानी Initial Public Offering कहते हैं।

हिंदी में इसे प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम कहा जाता है।

IPO में शेयर मिलने पर आप उस कंपनी के एक छोटे से हिस्से के मालिक बन जाते हैं।

शेयर का मतलब और कंपनी में हिस्सेदारी कैसे काम करती है, इसे आप हमारे शेयर क्या होता है? वाले लेख में उदाहरण से समझ सकते हैं।

अब यहाँ एक बात समझना जरूरी है।

हर IPO में लगाया गया पूरा पैसा कंपनी के पास ही नहीं जाता है।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी नए शेयर जारी कर रही है या उसके पुराने शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

कंपनी IPO क्यों लाती है? Fresh Issue और OFS का फर्क

किसी भी कंपनी के IPO लाने के कई कारण हो सकते हैं।

जैसे कंपनी को अपना बिजनेस बढ़ाना है, नया प्लांट लगाना है या पुराने कर्ज चुकाने हैं, लेकिन इसके लिए उसे पैसे की जरूरत है।

ऐसी स्थिति में कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटा सकती है।

इसे Fresh Issue कहते हैं। इसमें शेयर बेचने से मिलने वाला पैसा, संबंधित खर्च घटाने के बाद, कंपनी के पास जाता है।

लेकिन कई बार कंपनी के पुराने शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं।

इसे Offer for Sale यानी OFS कहते हैं।

इसमें पैसा शेयर बेचने वाले को मिलता है, कंपनी को नहीं।

किसी IPO में Fresh Issue और OFS दोनों भी हो सकते हैं।

चलिए इसे एलआईसी के उदाहरण से समझते हैं।

मई 2022 में LIC का IPO आया था जिसमें भारत सरकार ने अपनी 3.5% हिस्सेदारी बेची थी।

चूँकि यह पूरी तरह से OFS था, इसलिए शेयर बेचने से मिला पैसा भारत सरकार के पास गया, LIC को इससे कोई नया पैसा नहीं मिला।

अब आप समझ गए होंगे कि किसी IPO में यह देखना क्यों जरूरी है कि कंपनी नए शेयर जारी कर रही है या पुराने शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

IPO के बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकते हैं।

इसके बाद जब निवेशक आपस में उन शेयरों की खरीद बिक्री करते हैं तो उसका पैसा सामान्यतः शेयर बेचने वाले निवेशक को मिलता है, कंपनी को नहीं।

ipo fresh issue vs ofs

IPO कैसे काम करता है? DRHP और RHP क्या होते हैं?

मान लीजिए किसी कंपनी ने IPO लाने का फैसला किया।

अब वह सीधे एक दिन अपने शेयर बेचने नहीं लगती।

इसके लिए उसे कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

सबसे पहले कंपनी अपने ऑफर डॉक्यूमेंट तैयार करती है जिसमें उसके बिजनेस, प्रमोटर्स, वित्तीय स्थिति, कर्ज, जोखिम और IPO से जुड़े दूसरे जरूरी विवरण दिए जाते हैं।

इस दौरान आपने DRHP का नाम जरूर सुना होगा। इसका पूरा नाम Draft Red Herring Prospectus है।

यह एक ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट होता है जिसे Mainboard IPO के लिए SEBI के पास जमा किया जाता है।

वहीं छोटी कंपनियों के SME IPO में दस्तावेजों की जाँच और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया संबंधित स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से होती है।

SEBI कंपनी के ऑफर डॉक्यूमेंट की जाँच करता है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी या बदलाव भी माँग सकता है।

इसके बाद RHP यानी Red Herring Prospectus आता है।

Book Building वाले IPO में यह दस्तावेज IPO खुलने से पहले जारी किया जाता है।

इसमें कंपनी और IPO से जुड़ी विस्तृत जानकारी होती है, लेकिन शेयर की अंतिम कीमत बाद में तय होती है।

जब IPO की कीमत और बाकी जरूरी विवरण तय हो जाते हैं तो उन्हें अंतिम Prospectus में दर्ज किया जाता है।

IPO का Offer Document पढ़ते समय क्या देखना चाहिए?

कई लोगों को लगता है कि DRHP सैकड़ों पेज का है तो उसे समझना काफी मुश्किल होगा।

लेकिन ऐसा नहीं है।

शुरुआत में पूरा दस्तावेज पढ़ने की जरूरत नहीं है।

आप उन हिस्सों को पहले पढ़ सकते हैं जिनसे कंपनी के कारोबार और उसकी आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है।

सबसे पहले Business Overview में देखिए कि कंपनी क्या काम करती है और पैसा कैसे कमाती है।

इसके बाद Risk Factors को पढ़िए। यहाँ आपको पता चलेगा कि कंपनी के कारोबार में किस तरह के जोखिम हैं।

अब Objects of the Issue पर ध्यान दीजिए। इससे पता चलेगा कि कंपनी नए शेयर जारी करके मिलने वाले पैसे का क्या करने वाली है।

वहीं Financial Statements से कंपनी की कमाई, मुनाफे, कर्ज और Cash Flow की जानकारी मिलती है।

इसके अलावा कंपनी के Promoters, दूसरी संबंधित कंपनियों के साथ लेनदेन और उस पर चल रहे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों को भी देखना चाहिए।

मान लीजिए किसी कंपनी का ₹1,000 करोड़ का IPO आ रहा है। अब सवाल है कि क्या पूरे ₹1,000 करोड़ कंपनी के खाते में आएँगे?

जरूरी नहीं।

हो सकता है इसमें ₹400 करोड़ का Fresh Issue हो और बाकी ₹600 करोड़ पुराने शेयरधारक बेच रहे हों।

ऐसे में ₹600 करोड़ शेयर बेचने वालों को मिलेंगे, कंपनी को नहीं।

आप ये सभी जानकारियाँ SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध IPO दस्तावेजों में देख सकते हैं।

आईपीओ कैसे Apply करें?

IPO में आवेदन करने के लिए आपके नाम का Demat Account और Bank Account होना चाहिए।

अगर आपके पास पहले से किसी Broker का Trading और Demat Account है तो उसके App से IPO में आवेदन किया जा सकता है।

इसके अलावा आप अपने बैंक की ASBA सुविधा से भी आवेदन कर सकते हैं।

इसके लिए अलग Trading Account होना हर मामले में जरूरी नहीं है।

अब सवाल है कि आवेदन कैसे किया जाता है?

सबसे पहले जिस IPO में आवेदन करना है, उसकी तारीख, Price Band और Lot Size देखिए।

Lot Size का मतलब है कि एक Lot में कितने शेयर होंगे।

जैसे किसी IPO में एक Lot में 15 शेयर हैं तो आपको कम से कम 15 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा।

इसके बाद आपको शेयर की कीमत पर बोली लगानी होती है।

यदि यह Book Building प्रक्रिया वाला Mainboard IPO है तो पात्र Retail Investor Cut Off Price का विकल्प भी चुन सकता है।

इसका मतलब है कि आप IPO की आखिर में तय होने वाली कीमत पर आवेदन करने को तैयार हैं।

हालांकि Cut Off चुनने से शेयर मिलने की गारंटी नहीं होती।

इसके बाद बैंक की ASBA सुविधा या Broker के माध्यम से UPI का इस्तेमाल करके आवेदन जमा किया जा सकता है।

आवेदन करते समय PAN, Demat Account और बैंक की जानकारी सही भरें।

खासकर UPI से आवेदन करते समय किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल न करें।

आवेदन पूरा होने पर उसका Application Number भी संभालकर रखें।

आगे चलकर इसी की मदद से IPO का Status पता किया जा सकता है।

UPI और ASBA में पैसे का क्या होता है?

IPO में आवेदन करते समय आपने ASBA का नाम जरूर सुना होगा।

इसका पूरा नाम Application Supported by Blocked Amount है।

सुनने में थोड़ा कठिन लगता है, लेकिन इसे समझना काफी आसान है।

जब आप IPO में आवेदन करते हैं तो आपके बैंक खाते से पैसा तुरंत नहीं कटता, बल्कि उतनी रकम आपके खाते में Block कर दी जाती है।

चलिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए किसी IPO में एक Lot में 15 शेयर हैं और एक शेयर की कीमत ₹1,000 है।

इस तरह एक Lot के लिए आपको ₹15,000 की जरूरत होगी।

अब जैसे ही आपका आवेदन और पैसे Block करने की प्रक्रिया पूरी होती है, आपके बैंक खाते में ₹15,000 की रकम Block हो जाएगी।

अगर आपको IPO में शेयर मिल जाते हैं तो उनकी कीमत आपके बैंक खाते से काट ली जाएगी।

लेकिन अगर शेयर नहीं मिले तो यह Block हट जाएगा और आप उस पैसे को दोबारा इस्तेमाल कर सकेंगे।

यहाँ एक बात समझना जरूरी है।

ASBA में पैसा पहले से ही आपके बैंक खाते में रहता है।

इसलिए शेयर नहीं मिलने पर सामान्य तौर पर अलग से Refund आने के बजाय Block हटता है।

UPI Mandate क्या होता है?

अगर आपने UPI से IPO में आवेदन किया है तो आपके Google Pay, PhonePe या किसी दूसरे समर्थित UPI App में एक Mandate Request आएगी।

इसमें IPO का नाम और Block होने वाली रकम दिखाई देगी। सारी जानकारी सही होने पर आपको UPI PIN डालकर इसे Approve करना होगा।

लेकिन ध्यान रहे कि यह किसी को सामान्य UPI Payment भेजने जैसा नहीं है।

यहाँ आप अपने खाते में पैसे Block करने की अनुमति दे रहे हैं।

केवल Broker के App में Submitted दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि आपके पैसे भी सफलतापूर्वक Block हो गए हैं।

इसकी पुष्टि बैंक और आवेदन के Status से भी कर लें।

UPI Mandate नहीं आया या Pending दिख रहा है तो क्या करें?

मान लीजिए आपने दोपहर में IPO के लिए आवेदन कर दिया।

Broker की तरफ से आवेदन जमा होने का Message भी आ गया, लेकिन शाम तक आपके Google Pay या दूसरे UPI App में कोई Mandate Request नहीं आई।

अब क्या करें? क्या आपका आवेदन पूरा हो गया?

नहीं। केवल आवेदन जमा हो जाने का Message काफी नहीं है।

सबसे पहले अपने UPI App में Mandates या Pending Requests वाले हिस्से में देखिए।

कई बार Request आ जाती है, लेकिन उसका Notification दिखाई नहीं देता।

अगर वहाँ भी कुछ नहीं है तो आवेदन में दी गई UPI ID और उससे जुड़े बैंक खाते की जानकारी जाँचिए।

इसके बाद अपने Broker से संपर्क कीजिए। NSE के नियमों के अनुसार Broker कुछ परिस्थितियों में Mandate Request दोबारा भेज सकता है। लेकिन एक IPO के दौरान ऐसा केवल एक बार किया जा सकता है।

Mandate Approve हो गया, लेकिन Broker के App में Pending क्यों दिख रहा है?

यह परेशानी भी कई निवेशकों को होती है।

कई बार आपने UPI Mandate Approve कर दिया और बैंक में रकम भी Block हो गई, लेकिन Broker के App में अभी भी Pending दिखाई दे रहा है।

ऐसे में तुरंत आवेदन Cancel करने के बजाय पहले अपने बैंक में रकम Block होने की पुष्टि करें। फिर Broker से आवेदन की स्थिति जाँचें।

हो सकता है कि बैंक से जानकारी पहुँचने या App में Status Update होने में कुछ समय लग रहा हो।

एक और बात ध्यान रखें। IPO बंद होने की तारीख पर आवेदन और UPI Mandate Approve करने की अंतिम समयसीमा अलग हो सकती है। Mainboard और SME IPO के नियम भी एक जैसे नहीं हैं।

इसलिए किसी भी IPO की आखिरी तारीख पर आवेदन करने से पहले उसकी NSE की आधिकारिक Issue Information में दी गई समयसीमा जरूर देख लें।

IPO लगा या नहीं, कैसे पता करें? Allotment Status

IPO में आवेदन करने के बाद सबसे ज्यादा इंतजार इसी बात का रहता है कि शेयर मिले हैं या नहीं।

कई बार बैंक से पैसा ब्लॉक होने का मैसेज आ जाता है और हमें लगता है कि IPO मिल गया। लेकिन ऐसा नहीं है।

यहाँ एक बात समझ लीजिए कि IPO में आवेदन स्वीकार होना और शेयरों का Allotment होना दो अलग बातें हैं।

सबसे पहले आप NSE की वेबसाइट पर जाकर अपनी IPO Application की जानकारी चेक कर सकते हैं।

यहाँ आपको पता चल सकता है कि आपका आवेदन एक्सचेंज के सिस्टम में दर्ज हुआ है या नहीं। उपलब्ध होने पर Allotment की जानकारी भी दिखाई जा सकती है।

लेकिन आपको शेयर मिले हैं या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि उस IPO के Registrar की वेबसाइट से करना बेहतर है।

इसके लिए आप संबंधित IPO को चुनकर अपना PAN नंबर या Application Number डाल सकते हैं।

कुछ Registrar डीमैट खाते की जानकारी से भी स्टेटस चेक करने की सुविधा देते हैं।

आप नीचे दिए गए लिंक से भी IPO का स्टेटस चेक कर सकते हैं।

BSE IPO Application Status चेक करें

अगर वहाँ जानकारी उपलब्ध नहीं है तो संबंधित IPO की आधिकारिक घोषणा से Registrar की वेबसाइट का पता कर सकते हैं।

ध्यान रखें कि किसी अनजान WhatsApp मैसेज या सोशल मीडिया लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी न डालें।

Allotment के बाद शेयर और पैसे कब मिलते हैं?

पहले IPO की पूरी प्रक्रिया में 6 से 7 दिन या उससे भी ज्यादा समय लग जाता था।

लेकिन अब SEBI के नियमों के अनुसार सामान्य शेयर आईपीओ की लिस्टिंग IPO बंद होने के तीन Working Days के भीतर होनी होती है।

इसे T+3 कहते हैं। यहाँ T का मतलब IPO बंद होने का दिन है।

मान लीजिए कोई IPO शुक्रवार को बंद होता है। अगर बीच में कोई बाजार की छुट्टी नहीं है तो सामान्य तौर पर उसकी लिस्टिंग अगले बुधवार तक हो जानी चाहिए।

अब सवाल है कि आपके पैसों और शेयरों का क्या होगा?

मान लीजिए आपने ₹15,000 का IPO अप्लाई किया है। आवेदन करते समय आपके बैंक खाते में ₹15,000 ब्लॉक कर दिए जाते हैं।

अगर आपको पूरे ₹15,000 के शेयर मिल जाते हैं तो यह रकम आपके बैंक खाते से काट ली जाएगी और शेयर आपके डीमैट खाते में जमा हो जाएँगे।

अगर शेयर नहीं मिले तो ब्लॉक की गई रकम वापस इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

यहाँ ध्यान दीजिए कि ASBA में पैसा पहले से आपके बैंक खाते में ही रहता है।

इसलिए शेयर नहीं मिलने पर हमेशा अलग से पैसा वापस आने का मैसेज मिले, यह जरूरी नहीं है।

अगर शेयर मिलने की पुष्टि हो गई है लेकिन ट्रेडिंग ऐप में नहीं दिख रहे हैं तो अपना डीमैट स्टेटमेंट भी चेक कर लें।

ipo allotment process

IPO Allot नहीं हुआ, लेकिन पैसा अभी भी Block है?

कई बार IPO का Allotment आ जाता है और पता चलता है कि हमें शेयर नहीं मिले।

लेकिन बैंक खाते में पैसा अब भी ब्लॉक दिखाई देता है।

अब क्या करें?

सबसे पहले अपने बैंक खाते का Balance चेक कीजिए।

यहाँ आपको दो तरह के Balance दिखाई दे सकते हैं।

एक आपके खाते में कुल रकम और दूसरा वह पैसा जिसे आप अभी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मान लीजिए खाते में ₹30,000 हैं, लेकिन इस्तेमाल करने के लिए केवल ₹15,000 उपलब्ध हैं।

हो सकता है कि बाकी ₹15,000 IPO के लिए अभी भी ब्लॉक हों।

ऐसी स्थिति में बैंक से इसकी पुष्टि करें।

केवल UPI ऐप में Mandate चालू दिखाई देने से यह तय नहीं होता कि पैसा अभी भी ब्लॉक है।

अगर पैसा वास्तव में ब्लॉक है तो अपने बैंक या SCSB से संपर्क करें।

उन्हें अपना IPO Application Number और UPI Mandate Reference दें।

जिस Broker के जरिए आपने आवेदन किया था, वहाँ भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अगर परेशानी Allotment से जुड़ी है तो संबंधित Registrar से बात करें।

इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है तो आप SEBI की SCORES वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

एक बात और ध्यान रखें।

शिकायत करते समय कभी भी अपना UPI PIN, OTP या बैंक का पासवर्ड किसी को न बताएँ।

IPO में Apply करने से पहले क्या देखना चाहिए?

किसी IPO में पैसा लगाने से पहले केवल यह देखना काफी नहीं है कि कंपनी कितनी लोकप्रिय है या उसका IPO कितने गुना सब्सक्राइब हुआ है।

सबसे पहले आपको कंपनी के बिजनेस के बारे में समझना चाहिए।

जैसे कि कंपनी क्या बनाती है या कौन सी सर्विस देती है। उसके ग्राहक कौन हैं और पिछले कुछ सालों में उसकी कमाई और मुनाफे में कितना बदलाव हुआ है।

इसके लिए कंपनी के DRHP या RHP को जरूर पढ़ें।

इसमें आपको कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, बिजनेस से जुड़े जोखिम और IPO लाने के कारणों की जानकारी मिलेगी।

एक और जरूरी बात है कि कंपनी IPO से मिलने वाले पैसों का क्या करेगी।

मान लीजिए कंपनी ₹1,000 करोड़ का IPO ला रही है।

अब यह जानना जरूरी है कि क्या यह पूरा पैसा कंपनी को मिलेगा या पुराने शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

अगर IPO में Fresh Issue है तो उससे मिलने वाला पैसा कंपनी के पास जाता है।

वहीं Offer for Sale में पैसा शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलता है।

कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी देखिए। लेकिन केवल अधिक हिस्सेदारी होने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि कंपनी का भविष्य बहुत अच्छा होगा।

इसके साथ ही IPO का Issue Price और कंपनी का Valuation भी समझना जरूरी है।

मान लीजिए दो कंपनियों का बिजनेस लगभग एक जैसा है, लेकिन एक कंपनी अपने मुनाफे के मुकाबले काफी अधिक कीमत पर शेयर बेच रही है।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इतनी ज्यादा कीमत के पीछे क्या कारण हैं और उससे जुड़े जोखिम क्या हो सकते हैं।

इसलिए केवल किसी IPO की चर्चा, Subscription या Grey Market Premium देखकर उसके भविष्य के मुनाफे का अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा।

अगर आप शेयर बाजार में नए हैं तो पहले NiveshHindi के शेयर बाजार से जुड़े लेख भी पढ़ सकते हैं।

इससे आपको कंपनी की हिस्सेदारी और शेयरों के काम करने का तरीका समझने में मदद मिलेगी।

IPO Subscription और Grey Market Premium कितना बताते हैं?

किसी IPO के आने से पहले ही उसकी चर्चा शुरू हो जाती है।

कहीं सुनने को मिलता है कि IPO दस गुना सब्सक्राइब हो गया तो कहीं उसके Grey Market Premium यानी GMP की चर्चा होने लगती है।

लेकिन क्या ज्यादा Subscription होने का मतलब यह है कि IPO की लिस्टिंग भी बढ़िया होगी?

ऐसा जरूरी नहीं है।

मान लीजिए किसी IPO में Retail Investors के लिए एक लाख शेयर रखे गए हैं, लेकिन निवेशकों ने कुल दस लाख शेयरों के लिए आवेदन कर दिया।

इसका मतलब हुआ कि Retail हिस्से में मांग उपलब्ध शेयरों से दस गुना है।

अब जाहिर है कि सभी निवेशकों को शेयर नहीं मिल सकते।

ज्यादा Subscription होने से Allotment मिलने की संभावना कम हो सकती है, लेकिन इससे Listing पर मुनाफा होने की कोई गारंटी नहीं मिलती।

अब बात करते हैं Grey Market Premium की।

आपने अक्सर देखा होगा कि IPO खुलने से पहले ही इंटरनेट पर उसका GMP बताया जाने लगता है।

दरअसल, यह स्टॉक एक्सचेंज के बाहर अनौपचारिक बाजार में चलने वाला प्रीमियम है।

यह NSE या BSE पर तय होने वाला आधिकारिक भाव नहीं है।

इसका कोई भरोसेमंद नियामकीय मूल्य निर्धारण भी नहीं होता।

कई बार IPO का GMP काफी ज्यादा होता है, लेकिन Listing के समय शेयर उम्मीद से कम कीमत पर खुलता है।

इसलिए केवल GMP देखकर किसी IPO की सही कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

जरा सोचिए, जिस कंपनी का बिजनेस या Financial Statements आपने पढ़े ही नहीं, उसमें सिर्फ इसलिए पैसा लगाना कि उसका GMP बढ़ रहा है, कितना सही होगा?

IPO की खूब चर्चा होना और उसका अच्छा निवेश साबित होना दो अलग बातें हैं।

आईपीओ से जुड़े कुछ और जरूरी सवाल

UPI से ₹5 लाख तक IPO Apply हो सकता है, तो Retail Limit ₹2 लाख क्यों?

यहाँ कई निवेशकों को थोड़ी उलझन होती है।

दरअसल, Mainboard IPO में सामान्य Retail Individual Investor की आवेदन सीमा ₹2 लाख तक है। वहीं पात्र व्यक्तिगत निवेशक UPI के जरिए ₹5 लाख तक आवेदन कर सकते हैं।

मान लीजिए आप ₹3 लाख के शेयरों के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में UPI से आवेदन संभव हो सकता है, लेकिन आपका आवेदन Retail की जगह Non Institutional Investor यानी NII category में आएगा।

इसलिए UPI से आवेदन करने की सीमा और Retail category की सीमा को एक नहीं समझना चाहिए।

क्या SME IPO में भी एक Lot से आवेदन हो जाता है?

नहीं। जुलाई 2025 से SME IPO के नियम बदल चुके हैं।

अब सामान्य Individual Investor category में कम से कम दो Lots के लिए आवेदन करना होता है और उनकी कुल कीमत ₹2 लाख से अधिक होनी चाहिए।

SME IPO में Cut Off Price पर बोली लगाने की सुविधा भी नहीं है। आवेदन वापस लेने और बोली घटाने के नियम भी Mainboard IPO से अलग हैं।

इसलिए आवेदन करने से पहले उस IPO का Lot Size और बाकी शर्तें जरूर पढ़ें।

क्या एक PAN से कई बार IPO Apply करने पर Allotment मिलने की संभावना बढ़ जाती है?

कई निवेशकों को लगता है कि अलग अलग Broker के जरिए एक ही PAN से दो या तीन आवेदन करने पर IPO मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

लेकिन ऐसा नहीं है।

सामान्य IPO में एक PAN से एक ही आवेदन मान्य होता है। एक ही PAN से कई आवेदन करने पर Allotment के समय वे रद्द हो सकते हैं।

इसलिए ज्यादा आवेदन करने का मतलब यह नहीं कि आपको ज्यादा शेयर मिलने की संभावना होगी।

क्या IPO में शेयर मिलने पर Listing के दिन मुनाफा तय है?

बिल्कुल नहीं।

मान लीजिए किसी IPO में आपको ₹100 प्रति शेयर के हिसाब से शेयर मिले हैं।

अब अगर Listing के दिन शेयर ₹110 पर खुलता है तो उसकी कीमत आपके Issue Price से 10% ज्यादा है।

लेकिन अगर वही शेयर ₹90 पर खुला तो आपको शुरुआत में ही 10% का नुकसान दिखाई देगा।

इसलिए IPO Allot होना और उससे मुनाफा कमाना दो अलग बातें हैं।

अगर आपको शेयर की कीमत कैसे तय होती है, यह समझना है तो हमारा शेयर क्या होता है? वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।

IPO की आधिकारिक जानकारी कहाँ मिलेगी?

किसी भी IPO की जानकारी के लिए इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट मिल जाएँगी। लेकिन नियम, आवेदन और Allotment से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखना ज्यादा भरोसेमंद है।

अगर IPO से जुड़ी कोई शिकायत है तो पहले संबंधित बैंक, Broker या Registrar से संपर्क करें। समाधान नहीं मिलने पर SEBI SCORES पर शिकायत दर्ज करने का रास्ता भी उपलब्ध है।

किसी भी IPO में आवेदन करने से पहले यह समझना जरूरी है कि कंपनी पैसा क्यों जुटा रही है, उसका बिजनेस कैसा है और आपको किस कीमत पर शेयर मिल रहे हैं।

क्योंकि शेयर मिलने के बाद उसके भाव में होने वाले उतार चढ़ाव का जोखिम भी आपका ही होता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख का उद्देश्य आपको IPO और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में आसान भाषा में जानकारी देना है। यहाँ दी गई किसी भी जानकारी को शेयर खरीदने या बेचने की सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं और किसी भी IPO में मुनाफा होने की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस, उसकी वित्तीय स्थिति और उससे जुड़े जोखिमों को अच्छी तरह समझें। जरूरत पड़ने पर किसी SEBI Registered Investment Adviser की सलाह भी ले सकते हैं।

संदर्भ (References)

1. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (2026). Master Circular for Issue of Capital and Disclosure Requirements. 9 February 2026.

2. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (2018). SEBI (Issue of Capital and Disclosure Requirements) Regulations, 2018. संशोधित संस्करण, 21 March 2026 तक।

3. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (2025). Frequently Asked Questions on Use of UPI in Public Issues. May 2025.

4. National Stock Exchange of India (NSE). (2025). Changes in the Bidding Process for SME IPOs. Circular No. 07/2025, NSE/IPO/68604, 18 June 2025.

5. National Stock Exchange of India (NSE). Frequently Asked Questions on e-IPO. IPO application, bidding, allotment और multiple applications संबंधी आधिकारिक जानकारी।

6. Securities and Exchange Board of India (SEBI). Investor Education: IPO Through ASBA. आधिकारिक निवेशक शिक्षा सामग्री।

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