कौन सा है Best Defence ETF?
देखिए, पहले इसका जवाब थोड़ा आसान था।
जब मैंने यह लेख पहली बार लिखा था, तब मुख्य मुकाबला Motilal Oswal और Groww के Defence ETF के बीच था। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदल गई है।
अब Mirae Asset का BSE India Defence ETF भी बाजार में आ चुका है।
वहीं HDFC Defence Fund सक्रिय तरीके से Defence और उससे जुड़े कारोबारों वाली कंपनियों में निवेश करता है।
अगस्त 2026 में SBI ने भी BSE India Defence ETF के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट जमा किया है।
लेकिन यहाँ एक बात समझना जरूरी है कि ड्राफ्ट जमा होना और ETF का बाजार में लिस्ट हो जाना एक बात नहीं है।
तो अब केवल यह देखना कि किस ETF का रिटर्न ज्यादा रहा या किसका खर्च थोड़ा कम है, काफी नहीं है।
सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि ETF किस इंडेक्स को फॉलो कर रहा है, उसमें कौन-सी कंपनियाँ हैं, खर्च कितना है, इंडेक्स को कितनी सही तरह ट्रैक कर रहा है और बाजार में उसकी खरीद-बिक्री कितनी आसानी से हो रही है।
साथ ही Active Defence Mutual Fund का तरीका इन ETF से अलग कैसे है, यह भी समझना जरूरी है।
इसलिए मैं यहाँ किसी एक ETF को “विजेता” घोषित नहीं करूंगा।
पहले फर्क समझते हैं, आंकड़े देखते हैं और उसके बाद आप खुद तय कर सकते हैं कि आपके लिए कौन-सी बात ज्यादा मायने रखती है।
अगर आपके लिये ईटीएफ, एनएवी और बाजार भाव का फर्क नया है तो पहले ETF क्या है? वाला आसान लेख पढ़ सकते हैं।
| एक जरूरी बात यह लेख केवल financial education के लिए है। इसमें किसी ईटीएफ, म्यूचुअल फंड या शेयर को खरीदने, बेचने या होल्ड करने की सलाह नहीं दी गई है। डिफेंस थीम बहुत अधिक जोखिम और एक ही क्षेत्र में सिमटे हुए निवेश वाली थीम हो सकती है। |
डिफेंस ईटीएफ की चर्चा फिर इतनी क्यों बढ़ी?
पिछले कुछ समय से डिफेंस सेक्टर फिर से चर्चा में है।
इसकी एक बड़ी वजह सरकार का बढ़ता रक्षा खर्च भी है।
बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 लाख करोड़ रखे गए हैं, जो पिछले बजट अनुमान से 15.19% ज्यादा है।
इसमें करीब ₹1.39 लाख करोड़ की खरीद देश की डिफेंस इंडस्ट्री से करने का प्रावधान है।
दूसरी तरफ भारत का रक्षा उत्पादन भी बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया और रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ रहा।
इसमें अब निजी कंपनियों की भागीदारी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।
ऐसे में जाहिर है कि निवेशकों की नजर दोबारा डिफेंस शेयरों, ईटीएफ और डिफेंस म्यूचुअल फंड पर जाएगी।
लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है।
सरकार का डिफेंस बजट बढ़ना और डिफेंस ईटीएफ का रिटर्न बढ़ना एक ही बात नहीं है।
मान लीजिए किसी कंपनी को आगे बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
हो सकता है बाजार उस उम्मीद को पहले ही शेयर के भाव में शामिल कर चुका हो।
इसके बाद असली फर्क पड़ेगा कि ऑर्डर कब मिलता है, कंपनी उसे कितनी तेजी से पूरा करती है, मुनाफा कितना बचता है और उस समय शेयर की कीमत पहले से कितनी महंगी है।
इसलिए डिफेंस की कहानी अच्छी लगना अलग बात है और उस कहानी से निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलना अलग बात।
अभी तुलना में कौन-कौन से डिफेंस ईटीएफ हैं?
8 सितंबर 2026 तक भारत में हमें ये तीन लिस्टेड डिफेंस ईटीएफ मिले हैं:
| ईटीएफ | एक्सचेंज कोड | कौन-सा इंडेक्स फॉलो करता है | शुरुआत |
|---|---|---|---|
| Motilal Oswal Nifty India Defence ETF | MODEFENCE | Nifty India Defence TRI | 2024 |
| Groww Nifty India Defence ETF | GROWWDEFNC | Nifty India Defence TRI | 2024 |
| Mirae Asset BSE India Defence ETF | DEFENCE | BSE India Defence TRI | फरवरी 2026 |
एक बात यहाँ ध्यान देने वाली है।
Motilal Oswal और Groww दोनों एक ही Nifty India Defence Index को फॉलो करते हैं लेकिन Mirae का ईटीएफ BSE India Defence Index को फॉलो करता है।
मतलब नाम तीनों का डिफेंस ईटीएफ है, लेकिन अंदर की टोकरी बिल्कुल एक जैसी नहीं है।
इसे ऐसे समझिए।
मान लीजिए दो दुकानें एक ही लिस्ट देखकर सामान खरीद रही हैं, तो दोनों की टोकरी लगभग एक जैसी बनेगी।
लेकिन तीसरी दुकान की लिस्ट ही अलग है, तो उसके सामान और उनका वजन भी अलग हो सकता है।
यही वजह है कि सिर्फ खर्च, रिटर्न या ईटीएफ की कीमत देखकर तुलना करना आपको पूरा जवाब नहीं देगा।
आपको पहले यह देखना जरूरी है कि ईटीएफ आखिर किस इंडेक्स को फॉलो कर रहा है।
एक और अपडेट—SBI BSE India Defence ETF का ड्राफ्ट सेबी में 5 अगस्त 2026 को दाखिल हुआ है। अभी यह लिस्टेड ईटीएफ नहीं है, इसलिए इसे ऊपर की तालिका में शामिल नहीं किया गया है।
Motilal बनाम Groww — दोनों एक ही इंडेक्स हैं, फिर फर्क कहाँ है?
देखिए, Motilal और Groww दोनों ही ETF Nifty India Defence Index को फॉलो करते हैं।
तो इसका सीधा मतलब है कि दोनों में बड़े शेयर और उनका वजन आम तौर पर काफी हद तक एक जैसा ही रहेगा।
आखिर दोनों का काम एक ही इंडेक्स को दोहराना है।
अब मान लीजिए एक ETF ने एक साल में 20.10% रिटर्न दिया और दूसरे ने 20.30%।
तो केवल इस 0.20% के फर्क को देखकर किसी एक को बेहतर मान लेना ठीक नहीं होगा।
इतना छोटा फर्क कई वजहों से आ सकता है।
एक ही इंडेक्स को फॉलो करने वाले दो ETF में असली तुलना कुछ दूसरी चीजों पर ज्यादा काम की होती है, जैसे —
- खर्च कितना है?
- ETF अपने इंडेक्स से कितना पीछे या आगे रहा?
- ट्रैकिंग एरर कितना है?
- बाजार में इसकी खरीद-बिक्री आसानी से हो रही है या नहीं?
- ETF का बाजार भाव उसके NAV से बहुत ज्यादा ऊपर या नीचे तो नहीं चल रहा?
ताजा आंकड़े क्या कह रहे हैं?
नीचे दिए गए आंकड़े 8 सितंबर 2026 के आसपास उपलब्ध जानकारी के आधार पर हैं और इन्हें स्थायी आंकड़े मत समझिए।
AUM, Expense Ratio, Tracking Error और कारोबार का वॉल्यूम समय के साथ बदलता रहता है।
इसलिए लेख को दोबारा अपडेट करते समय इन्हें फिर जांचना जरूरी है।
| माप | Motilal | Groww | Mirae |
|---|---|---|---|
| इंडेक्स | Nifty India Defence | Nifty India Defence | BSE India Defence |
| Expense Ratio | लगभग 0.62% | लगभग 0.64% | लगभग 0.72% |
| AUM | लगभग ₹1,310 करोड़ | लगभग ₹344 करोड़ | लगभग ₹147 करोड़ |
| 1 माह का औसत वॉल्यूम | लगभग 13.6 लाख यूनिट | लगभग 2.5 लाख यूनिट | लगभग 2.5 लाख यूनिट |
| Tracking Error | लगभग 0.06% | लगभग 0.06% | लगभग 0.20%* |
Mirae ETF फरवरी 2026 में शुरू हुआ है। इसलिए इसके कुछ महीनों के आंकड़ों को पुराने ETF के लंबे इतिहास के बराबर रखकर फैसला करना ठीक नहीं होगा।
तो यहाँ से क्या समझ आया?
Motilal और Groww का इंडेक्स एक ही है। इसलिए इन दोनों की तुलना करते समय खर्च, ट्रैकिंग और बाजार में खरीद-बिक्री कितनी आसानी से हो रही है—ये बातें ज्यादा मायने रखती हैं।
लेकिन Mirae को सिर्फ उसी लाइन में रखकर 0.62%, 0.64% और 0.72% देखकर फैसला करना एक अधूरी तुलना होगी।
क्यों?
क्योंकि Mirae BSE India Defence Index को फॉलो करता है, जबकि Motilal और Groww Nifty India Defence Index को।
यानी Mirae के मामले में पहले यह समझना ज्यादा जरूरी है कि दोनों Defence Index में फर्क क्या है।
उसके बाद ही ETF के खर्च और बाकी आंकड़ों की तुलना का सही मतलब निकलता है।
Mirae का BSE India Defence Index अलग क्यों है?

2026 में यहाँ सबसे बड़ा बदलाव यही आया है और यही वह बात है जो सिर्फ “टॉप डिफेंस ईटीएफ” की सूची देखकर आसानी से समझ नहीं आती।
Motilal Oswal और Groww का Defence ETF Nifty India Defence Index को ट्रैक करता है वहीं Mirae Asset का Defence ETF BSE India Defence Index को ट्रैक करता है।
अब सवाल है कि इससे फर्क क्या पड़ता है?
Nifty India Defence Index में कंपनियां Nifty Total Market से चुनी जाती हैं।
डिफेंस से सीधे जुड़ी कंपनियों के अलावा ऐसी कंपनियां भी इसमें आ सकती हैं जिनकी कम-से-कम 10% आमदनी डिफेंस कारोबार से आती हो।
साथ ही किसी एक शेयर का वजन 20% से ज्यादा नहीं रखा जाता।
BSE India Defence Index का तरीका थोड़ा अलग है।
इसमें कंपनियां BSE 1000 से ली जाती हैं और उन्हें दो हिस्सों में बांटा जाता है—Core Defence और Non-Core Defence।
Core Defence कंपनियों का कुल हिस्सा 75% तक रखा जा सकता है और किसी एक कंपनी का वजन 15% तक।
वहीं Non-Core Defence कंपनियों का कुल हिस्सा 25% और किसी एक कंपनी का वजन 5% तक सीमित रहता है।
अब इसे आसान भाषा में समझिए।
मान लीजिए दो ईटीएफ के नाम में “Defence” लिखा है तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि दोनों के अंदर वही कंपनियां हों और उनका वजन भी वही हो।
एक ईटीएफ में HAL और BEL जैसी बड़ी सरकारी डिफेंस कंपनियों का वजन ज्यादा हो सकता है, जबकि दूसरे में डिफेंस से जुड़े निजी या सहायक कारोबारों को थोड़ा ज्यादा स्थान मिल सकता है।
यानी ईटीएफ का नाम देखने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि वह किस Index को ट्रैक कर रहा है और उस Index में कंपनियां चुनी कैसे जाती हैं।
क्या डिफेंस फंड का मतलब केवल HAL, BEL और सरकारी कंपनियां हैं?
यह सवाल कई निवेशकों के मन में आता है।
डिफेंस फंड का नाम सुनते ही अक्सर HAL, BEL और दूसरी सरकारी कंपनियों का नाम दिमाग में आता है लेकिन हर डिफेंस फंड का पोर्टफोलियो केवल सरकारी कंपनियों तक सीमित हो, यह जरूरी नहीं है।
मान लीजिए कोई निजी कंपनी डिफेंस के लिए उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिसाइल के पुर्जे या दूसरी जरूरी चीजें बनाती है।
अगर वह संबंधित इंडेक्स के नियमों में फिट बैठती है, तो उसे भी जगह मिल सकती है।
Nifty India Defence Index में ऐसी कंपनियों को शामिल करने के नियम हैं जो डिफेंस कारोबार से पर्याप्त आमदनी कमाती हैं और तय शर्तों को पूरा करती हैं।
वहीं BSE India Defence Index में कंपनियों को Core Defence और Non-Core Defence के रूप में भी देखा जाता है।
इसलिए दोनों इंडेक्स में कंपनियों की संख्या और उनका वजन अलग हो सकता है।
इसलिए केवल फंड का नाम देखकर यह मत मानिए कि अंदर सिर्फ सरकारी डिफेंस कंपनियां ही होंगी।
असली तस्वीर देखने के लिए उसके इंडेक्स के नियम और मुख्य होल्डिंग्स देखना ज्यादा जरूरी है।
अब बात एक्टिव म्यूचुअल फंड की।
HDFC Defence Fund डिफेंस और उससे जुड़े दूसरे कारोबारों में सक्रिय तरीके से निवेश करता है।
यहां फंड मैनेजर किसी इंडेक्स की कंपनियों और उनके वजन को हूबहू दोहराने के लिए मजबूर नहीं है।
यही एक्टिव फंड और पैसिव ईटीएफ के बीच एक बड़ा फर्क है।
MODEFENCE share price लोग क्यों खोज रहे हैं?
MODEFENCE, Motilal Oswal Nifty India Defence ETF का एक्सचेंज कोड है।
यह HAL या BEL की तरह किसी एक कंपनी का शेयर नहीं है।
जब आप MODEFENCE की यूनिट खरीदते हैं, तो उसके पीछे किसी एक कंपनी के बजाय पूरा Nifty India Defence Index पोर्टफोलियो होता है।
अब मान लीजिए एक डिफेंस ईटीएफ की यूनिट ₹80 में मिल रही है और दूसरे की ₹110 में।
तो क्या ₹80 वाला ईटीएफ सस्ता है?
जरूरी नहीं।
सिर्फ यूनिट का बाजार भाव कम होने से कोई ईटीएफ सस्ता या बेहतर नहीं हो जाता।
उसकी सही तुलना करने के लिए देखना होगा कि वह कौन-सा इंडेक्स ट्रैक कर रहा है, एनएवी क्या है, ट्रैकिंग कैसी है और उसे खरीदने-बेचने में कितनी आसानी है।
क्या सबसे कम एक्सपेंस रेशियो वाला ही “बेस्ट” डिफेंस ईटीएफ है?
पहली नजर में तो बात सीधी लगती है कि जिस ईटीएफ का खर्च कम है, वही बेहतर होना चाहिए। लेकिन केवल एक्सपेंस रेशियो देखकर फैसला करना सही नहीं होगा।
मान लीजिए दो ईटीएफ एक ही इंडेक्स को फॉलो कर रहे हैं तो ऐसे में कम खर्च होना जरूर एक फायदा है।
लेकिन साथ में यह भी देखना होगा कि ईटीएफ अपने इंडेक्स को कितनी सही तरह फॉलो कर रहा है, उसकी खरीद-बिक्री आसानी से हो रही है या नहीं और बाजार भाव एनएवी से कितना अलग चल रहा है।
अब मामला तब और बदल जाता है जब दोनों ईटीएफ के इंडेक्स ही अलग हों।
जैसे Mirae का डिफेंस ईटीएफ BSE India Defence Index को फॉलो करता है, जबकि दूसरे कई डिफेंस ईटीएफ Nifty India Defence Index को।
ऐसे में केवल यह देखना कि किसका एक्सपेंस रेशियो 0.10% कम है, अधूरी तुलना होगी।
अब जरा सोचिए—खर्च थोड़ा कम है, लेकिन आपके पैसे जिन कंपनियों में लग रहे हैं उनका पूरा मिश्रण ही अलग है। तब असली फर्क एक्सपेंस रेशियो से ज्यादा आपको मिल रहे डिफेंस एक्सपोजर का है।
अगर आपको एक्सपेंस रेशियो का पूरा असर समझना हो तो म्यूचुअल फंड एक्सपेंस रेशियो क्या है? वाला लेख यहां काम आएगा।
अगर एयूएम बड़ा है तो क्या ईटीएफ ज्यादा भरोसेमंद है?
यह बात इतनी सीधी नहीं है, इसलिए इसे थोड़ा ठीक से समझना जरूरी है।
एयूएम यानी उस फंड में कुल कितनी रकम लगी हुई है।
बड़ा एयूएम यह जरूर बताता है कि फंड का आकार बड़ा है, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वह ईटीएफ ज्यादा सुरक्षित है, बेहतर है या आगे ज्यादा रिटर्न देगा।
मान लीजिए दो Defence ETF हैं।
एक का एयूएम ₹1,000 करोड़ है और दूसरे का ₹300 करोड़ तो केवल इतना देखकर पहले वाले को बेहतर मान लेना सही नहीं होगा।
ईटीएफ में खरीद-बिक्री कितनी आसानी से हो रही है, यह देखने के लिए हमें उसका वॉल्यूम, खरीद और बिक्री के भाव में कितना फर्क है, बाजार भाव एनएवी से कितना दूर है और जिन शेयरों में ईटीएफ ने पैसा लगाया है उनकी लिक्विडिटी कैसी है—ये बातें भी देखनी पड़ती हैं।
इसलिए एयूएम काम की जानकारी है, लेकिन अकेले इससे फैसला नहीं किया जा सकता।
वॉल्यूम ज्यादा है तो क्या वही ईटीएफ चुनना चाहिए?
ईटीएफ वॉल्यूम देखना जरूरी है। किसी ईटीएफ में अगर रोज अच्छी खरीद-बिक्री हो रही है तो उसकी यूनिट खरीदना या बेचना आम तौर पर आसान हो सकता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
मान लीजिए एक ईटीएफ में रोज लाखों यूनिट का कारोबार होता है और दूसरे में बहुत कम।
तो पहली नजर में पहला ईटीएफ ज्यादा आसान लग सकता है फिर भी सिर्फ वॉल्यूम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
खरीद और बिक्री के भाव के बीच कितना फर्क है, यानी बिड-आस्क स्प्रेड, और बड़ी खरीद-बिक्री से भाव कितना बदलता है, यानी इंपैक्ट कॉस्ट, यह भी देखना जरूरी है।
₹5,000 या ₹10,000 की छोटी खरीद में शायद यह फर्क ज्यादा महसूस न हो, लेकिन बड़ी रकम में यह लागत मायने रख सकती है।
ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस — दोनों क्यों देखें?
ईटीएफ का काम अपने इंडेक्स को जितना हो सके उतना करीब फॉलो करना है। लेकिन फंड के खर्च, थोड़ी नकदी रखने, शेयर खरीदने-बेचने और दूसरे कामकाजी कारणों से ईटीएफ और उसके इंडेक्स का रिटर्न बिल्कुल एक जैसा नहीं रहता।
यहीं पर दो शब्द सामने आते हैं—ट्रैकिंग एरर और ट्रैकिंग डिफरेंस।
ट्रैकिंग एरर मोटे तौर पर यह बताता है कि समय के साथ फंड और इंडेक्स के बीच का फर्क कितना ऊपर-नीचे होता रहा होगा।
वहीं ट्रैकिंग डिफरेंस बताता है कि किसी तय अवधि में ईटीएफ का रिटर्न अपने इंडेक्स से वास्तव में कितना पीछे या आगे रहा।
इसलिए सिर्फ यह देखकर कि “इस ईटीएफ का ट्रैकिंग एरर सबसे कम है”, उसे विजेता मान लेना भी सही तरीका नहीं है।
अच्छा comparison तभी बनेगा जब एयूएम, खर्च, लिक्विडिटी और ट्रैकिंग—इन सबको मिलकर साथ देखा जाए।
दो डिफेंस फंड रख लिए तो क्या डायवर्सिफिकेशन बढ़ गया?

यह सवाल मुझे काफी काम का लगा। एक निवेशक के पास दो डिफेंस फंड थे और वह सोच रहा था कि दोनों रखने से उसका पोर्टफोलियो ज्यादा डायवर्सिफाइड हो जाएगा।
लेकिन यहां फंड के नाम देखकर धोखा हो सकता है।
मान लीजिए आपने Motilal Oswal Nifty India Defence ETF और Groww Nifty India Defence ETF दोनों ले रखे हैं।
यहाँ फंड दो हैं, फंड हाउस भी अलग हैं, लेकिन दोनों एक ही इंडेक्स को फॉलो करते हैं इसलिए इनके बड़े शेयर भी लगभग वही रहते हैं।
अब जरा सोचिए।
एक थाली में HAL, BEL, Bharat Forge और Solar Industries हैं और दूसरी थाली में भी लगभग वही चीजें हैं और मात्रा भी लगभग उतनी ही है।
अब थालियां दो तो हो गईं, लेकिन खाना तो काफी हद तक वही है।
ठीक यही बात यहां भी है।
इसलिए सिर्फ दो फंड रखने से डायवर्सिफिकेशन अपने आप नहीं बढ़ जाता। अगर दोनों फंड में ज्यादातर कंपनियां और उनका वजन एक जैसा है, तो आपका पैसा भी लगभग उसी जगह लगा हुआ है।
डायवर्सिफिकेशन समझना हो तो फंड की गिनती मत कीजिए बल्कि यह देखिए कि उसके अंदर कौन-कौन सी कंपनियां हैं और उनमें कितना पैसा लगा हुआ है।
डिफेंस ETF डायवर्सिफाइड है या कंसंट्रेटेड?
ETF नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि इसमें बहुत सारे शेयर होंगे, इसलिए जोखिम अपने आप फैल गया होगा लेकिन थीमैटिक ETF में ऐसा जरूरी नहीं है।
Groww Nifty India Defence ETF के 7 सितंबर 2026 वाले पोर्टफोलियो में HAL करीब 21.6%, BEL 19.0%, Bharat Forge 15.1% और Solar Industries 11.6% थे।
यानि सिर्फ चार कंपनियां मिलकर करीब 67% पोर्टफोलियो बनाती थीं।
Motilal भी उसी Nifty India Defence Index को फॉलो करता है, इसलिए उसका पोर्टफोलियो भी काफी हद तक इसी तरह रहता है।
अब यहां एक बात समझिए।
किसी ETF में 19 शेयर होना और उसका बहुत ज्यादा डायवर्सिफाइड होना एक ही बात नहीं है।
अगर चार-पांच कंपनियों का वजन बहुत ज्यादा है, तो उन्हीं कंपनियों में बड़ी तेजी या गिरावट पूरे ETF पर अच्छा-खासा असर डाल सकती है।
BSE India Defence Index की बनावट थोड़ी अलग है।
इसमें एक Core Defence शेयर का वजन 15% और Non-Core शेयर का वजन 5% तक सीमित रखा जाता है।
इससे पोर्टफोलियो की बनावट अलग हो सकती है।
लेकिन आखिर में यह भी डिफेंस थीम ही है तो इसे किसी ब्रॉड मार्केट फंड जैसा डायवर्सिफिकेशन समझना ठीक नहीं होगा।
डिफेंस ईटीएफ, डिफेंस इंडेक्स फंड और एक्टिव डिफेंस फंड – तीनों में क्या फर्क है?
कई लोग Motilal Defence Fund, Groww Defence Fund और HDFC Defence Fund को लगभग एक जैसा मान रहे हैं।
देखिये नाम में “Defence” जरूर है, लेकिन तीनों का काम करने का तरीका एक जैसा नहीं है।
अब जरा आसान भाषा में समझिए।
मान लीजिए आपको डिफेंस कंपनियों में निवेश करना है।
अब आपके पास एक रास्ता यह है कि कोई फंड तय इंडेक्स की कंपनियों को लगभग उसी अनुपात में पकड़े रहे।
दूसरा रास्ता यह है कि फंड मैनेजर खुद तय करे कि किन कंपनियों में कितना पैसा लगाना है।
यहीं से इन फंडों का असली फर्क शुरू होता है।
| रास्ता | कैसे काम करता है | क्या समझना जरूरी है |
|---|---|---|
| डिफेंस ईटीएफ | किसी डिफेंस इंडेक्स को फॉलो करता है और शेयर की तरह एक्सचेंज पर खरीदा-बेचा जाता है | डीमैट खाता, बाजार भाव, खरीद-बिक्री की आसानी और इंडेक्स से कितना फर्क पड़ रहा है |
| डिफेंस इंडेक्स म्यूचुअल फंड | किसी डिफेंस इंडेक्स को पैसिव तरीके से फॉलो करता है, लेकिन इसे खरीदने के लिए एक्सचेंज पर जाने की जरूरत नहीं | यूनिट एनएवी पर मिलती है। खर्च और इंडेक्स को कितनी सही तरह फॉलो कर रहा है, यह देखें |
| ईटीएफ फंड-ऑफ-फंड | यह खुद शेयर नहीं खरीदता, बल्कि नीचे मौजूद डिफेंस ईटीएफ में पैसा लगाता है | यहाँ एक फंड के ऊपर दूसरा फंड जुड़ जाता है, इसलिए कुल खर्च समझना जरूरी है |
| HDFC Defence Fund | इसमें फंड मैनेजर डिफेंस और उससे जुड़ी कंपनियों में अपनी समझ के अनुसार पोर्टफोलियो बनाता है | इसे इंडेक्स की हूबहू नकल नहीं करनी होती। इसलिए खर्च, होल्डिंग्स और फंड मैनेजर के फैसले ज्यादा मायने रखते हैं |
अब यहाँ एक बात साफ है।
सिर्फ नाम में “Defence” होने से ये सभी फंड एक जैसे नहीं हो जाते।
एक फंड इंडेक्स को फॉलो कर रहा है, दूसरा उसी ईटीएफ में पैसा लगा रहा है, जबकि एक्टिव फंड में फंड मैनेजर खुद कंपनियों और उनके वजन का फैसला कर रहा है।
इसलिए इनकी तुलना सिर्फ पिछले एक साल के रिटर्न से करना सही तस्वीर नहीं देता है।
ईटीएफ और इंडेक्स फंड का मूल फर्क विस्तार से समझने के लिए आप इंडेक्स फंड बनाम ईटीएफ वाला लेख पढ़ सकते हैं।
HDFC Defence Fund को उसी टेबल में सीधे क्यों नहीं रखा?
क्योंकि HDFC Defence Fund एक एक्टिव फंड है।
इसका बेंचमार्क Nifty India Defence TRI है, लेकिन फंड मैनेजर के लिए जरूरी नहीं कि वह इंडेक्स की हर कंपनी को उसी अनुपात में रखे।
वह अपने हिसाब से किसी कंपनी का वजन कम या ज्यादा कर सकता है।
इसलिए इसकी तुलना Motilal, Groww या Mirae ETF से केवल यह देखकर करना कि किसका एक्सपेंस रेशियो कम है, सही तुलना नहीं होगी।
31 अगस्त 2026 को HDFC Defence Fund का एयूएम ₹11,477.59 करोड़ था और इसका रिस्कोमीटर “बहुत अधिक जोखिम” दिखा रहा था।
अभी इस फंड में नई एकमुश्त रकम और स्विच-इन बंद हैं।
नई मासिक SIP और STP ₹25,000 प्रति निवेशक, PAN स्तर तक स्वीकार की जा रही हैं।
यह नियम आगे बदल सकता है, इसलिए निवेश से पहले AMC की वेबसाइट पर मौजूदा स्थिति जरूर देख लें।
अब सवाल है कि एक्टिव फंड को देखें तो क्या देखें?
सिर्फ पुराना रिटर्न नहीं देखना है।
आप देखिए कि फंड मैनेजर ने इंडेक्स से अलग क्या किया है।
कौन-सी कंपनियां ज्यादा रखी हैं, कौन-सी कम?
पोर्टफोलियो कुछ गिनी-चुनी कंपनियों में ज्यादा सिमट गया है या जोखिम थोड़ा फैला है? और इस अलग पोर्टफोलियो के बदले खर्च कितना है?
यानी एक्टिव और पैसिव फंड का फैसला केवल पिछले रिटर्न देखकर करना ठीक नहीं है।
क्या निजी Defence कंपनियों के लिए एक्टिव फंड ही जरूरी है?
नहीं।
यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि पैसिव Defence Fund में केवल HAL और BEL जैसी सरकारी कंपनियां ही मिलेंगी।
Nifty और BSE दोनों Defence इंडेक्स के नियम ऐसे हैं कि पात्र निजी और Defence से जुड़ी दूसरी कंपनियां भी उनमें आ सकती हैं।
फर्क इस बात का है कि कंपनी को शामिल करने के नियम क्या हैं और उसे कितना वजन दिया गया है।
HDFC जैसे एक्टिव फंड में मैनेजर अपने तय दायरे के भीतर अलग कंपनियां चुन सकता है।
लेकिन केवल “एक्टिव” होने का मतलब यह नहीं कि उसमें निजी कंपनियां ज्यादा ही होंगी या उसका नतीजा बेहतर ही होगा।
अगर आपके मन में सवाल है—
“मेरे Defence Fund में HAL और BEL ही इतना ज्यादा क्यों दिख रहे हैं?”
तो सबसे पहले उसकी टॉप होल्डिंग्स देखिए। फिर यह देखिए कि जिस इंडेक्स को वह फंड मान रहा है, उसमें कंपनियों का वजन कैसे तय होता है।
उसके बाद आपको एक्टिव और पैसिव का फर्क ज्यादा साफ समझ आएगा।
सरकार Defence Budget बढ़ा रही है तो क्या ETF का रिटर्न भी बढ़ेगा?
यहीं सबसे ज्यादा गड़बड़ होती है।
सोशल मीडिया पर बात अक्सर इतनी सी बना दी जाती है—
“सरकार Defence पर ज्यादा खर्च करेगी, इसलिए Defence कंपनियां बढ़ेंगी और ETF भी ऊपर जाएगा।”
सुनने में बात बिल्कुल सीधी लगती है। लेकिन बाजार इतना सीधा नहीं चलता।
मान लीजिए किसी Defence कंपनी के ऑर्डर अगले पांच साल में काफी बढ़ने वाले हैं।
यह अच्छी बात है।
लेकिन अगर बाजार को इसकी उम्मीद पहले से है और शेयर की कीमत पहले ही बहुत ऊपर चली गई है, तो अच्छे नतीजे आने के बाद भी आपको वैसा रिटर्न मिले, यह जरूरी नहीं।
दूसरी तरफ ऑर्डर मिलने के बाद भी काम समय पर पूरा न हो, लागत बढ़ जाए, मुनाफे का मार्जिन घटे या भुगतान देर से आए तो कंपनी पर दबाव पड़ सकता है।
इसलिए Defence Budget और उत्पादन के आंकड़े हमें कारोबार की दिशा समझाते हैं।
वे यह नहीं बताते कि आगे कितना रिटर्न मिलेगा।
Defence शेयर पहले ही बहुत भाग चुके हैं तो क्या अब देर हो गई?
यह सवाल भी बार-बार देखने को मिलता है—
“Defence sector इतना ऊपर जा चुका है, अब निवेश करने में देर तो नहीं हो गई?”
देखिये इसका कोई एक जवाब नहीं है जो हर समय और हर व्यक्ति पर लागू हो जाए।
किसी सेक्टर में पहले बहुत तेजी आ चुकी है, इसका मतलब यह नहीं कि वह आगे भी जरूर बढ़ेगा।
और अगर वह 15–20% गिर गया तो केवल गिरावट देखकर यह भी नहीं कहा जा सकता कि अब वह सस्ता हो गया है।
जरा सोचिए।
₹100 का कोई शेयर ₹300 गया और फिर गिरकर ₹250 हो गया।
सिर्फ इसलिए कि वह ₹300 से नीचे आ गया, यह जरूरी नहीं कि ₹250 पर वह सस्ता हो।
इसलिए पिछली तेजी या गिरावट से ज्यादा जरूरी है कि आप वैल्यूएशन, कंपनियों की कमाई की उम्मीद, इंडेक्स में कुछ बड़ी कंपनियों का वजन और अपने पोर्टफोलियो में पहले से मौजूद Defence निवेश को साथ देखकर समझें।
एसआईपी कर दूं तो क्या थीमैटिक जोखिम कम हो जाएगा?
एसआईपी का फायदा यह है कि आपका पूरा पैसा एक ही दिन बाजार में नहीं जाता।
मान लीजिए आपके पास ₹60,000 हैं।
अगर एक साथ लगाने के बजाय ₹5,000 हर महीने लगाए, तो खरीद अलग-अलग भाव पर होती रहेगी।
इससे एक ही दिन गलत समय पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कुछ हद तक बंट सकता है।
लेकिन यहाँ एक बात समझना जरूरी है।
अगर हर महीने आपका पैसा उसी डिफेंस इंडेक्स में जा रहा है, तो कंपनियां लगभग वही रहेंगी यानी एसआईपी करने से डिफेंस थीम का कंसंट्रेशन जोखिम खत्म नहीं होता।
इसी तरह यह कहना कि “मैं तो 5–7 साल के लिए रखूंगा” भी इस जोखिम को खत्म नहीं करता।
समय लंबा होना अलग बात है और आपका पैसा कितनी सीमित कंपनियों या एक ही सेक्टर में लगा है, यह अलग बात।
इसलिए एसआईपी को डायवर्सिफिकेशन समझना सही नहीं है।
शुरुआती निवेशक के लिए डिफेंस ईटीएफ ठीक है?
सिर्फ यह देखकर जवाब नहीं दिया जा सकता कि आप नए निवेशक हैं या कई साल से निवेश कर रहे हैं।
पहले यह समझिए कि डिफेंस ईटीएफ कोई ब्रॉड मार्केट फंड नहीं है और यहाँ आपका पैसा एक खास थीम की कंपनियों में जा रहा है।
अगर आपको यह भी नहीं पता कि इंडेक्स में कौन-सी कंपनियां हैं, टॉप 5 कंपनियों का वजन कितना है या आपके दूसरे फंड में भी वही कंपनियां पहले से हैं, तो पहले इन्हीं चीजों को समझना ज्यादा जरूरी है।
रिस्कोमीटर पर “बहुत अधिक जोखिम” लिखा हो तो उसे भी सिर्फ एक औपचारिक लाइन समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डिफेंस सेक्टर की कहानी अच्छी लगना एक बात है और उसके जोखिम को समझना दूसरी।
पुराने रिटर्न देखकर “बेस्ट” डिफेंस ईटीएफ चुनना क्यों सही तरीका नहीं है?
डिफेंस थीम ने कुछ समय में बहुत तेज रिटर्न दिए हैं। जाहिर है, सबसे पहले नजर भी वहीं जाती है।
लेकिन केवल पिछले रिटर्न देखकर ईटीएफ चुनने में कुछ दिक्कतें हैं।
पहली बात, Motilal और Groww जैसे ईटीएफ एक ही इंडेक्स को ट्रैक करते हैं इसलिए इनके रिटर्न आमतौर पर काफी पास रह सकते हैं।
थोड़े से फर्क पर किसी एक को विजेता घोषित करना ठीक नहीं होगा।
दूसरी बात, Mirae का ईटीएफ नया है और अभी एक साल का पूरा इतिहास भी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में उसे 1 साल के रिटर्न की तालिका में पुराने ईटीएफ के सामने रखकर “बेहतर” या “कमजोर” कहना सही तुलना नहीं होगी।
तीसरी बात, किसी इंडेक्स का पुराना या बैक-टेस्ट किया गया रिटर्न जरूरी नहीं कि उस समय किसी असली निवेशक को मिला भी हो।
कई बार इंडेक्स का पुराना डेटा उपलब्ध होता है, जबकि ईटीएफ काफी बाद में लॉन्च हुआ होता है।
इसलिए पुराने रिटर्न को जानकारी की तरह देखिए, फैसला मानकर नहीं।
भविष्य में वही रिटर्न दोबारा मिलेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
अगर मुझे तीनों डिफेंस ईटीएफ की तुलना करनी हो तो क्या देखूं?
इसे बहुत मुश्किल बनाने की जरूरत नहीं है। किसी भी डिफेंस ईटीएफ की फैक्टशीट खोलिए और नीचे की बातें एक-एक करके देखिए।
| देखने वाली बात | अपने आप से क्या पूछें? |
|---|---|
| 1. इंडेक्स | यह Nifty India Defence को ट्रैक करता है या BSE India Defence को? |
| 2. होल्डिंग्स | टॉप 5 और टॉप 10 कंपनियों में कितना पैसा सिमटा हुआ है? |
| 3. ओवरलैप | क्या मेरे दूसरे फंड में भी लगभग यही कंपनियां पहले से हैं? |
| 4. एक्सपेंस रेशियो | सालाना खर्च कितना है और यह आंकड़ा कब का है? |
| 5. ट्रैकिंग | फंड अपने इंडेक्स के कितना करीब चल पाया है? |
| 6. लिक्विडिटी | खरीदने-बेचने का वॉल्यूम और बिड-आस्क स्प्रेड कैसा है? बाजार भाव एनएवी से बहुत अलग तो नहीं है? |
| 7. ढांचा | मैं ईटीएफ ले रहा हूं, इंडेक्स फंड, फंड-ऑफ-फंड या एक्टिव फंड? |
| 8. जोखिम | इसे जोड़ने से मेरा पोर्टफोलियो एक ही थीम पर जरूरत से ज्यादा निर्भर तो नहीं हो रहा? |
बस इतना समझ आ जाए तो “कौन-सा बेस्ट है?” वाला सवाल अपने आप थोड़ा बदल जाता है।
फिर सवाल यह नहीं रहता कि किसने पिछले साल सबसे ज्यादा रिटर्न दिया, बल्कि यह हो जाता है कि मैं वास्तव में क्या खरीद रहा हूं और उसके साथ कौन-सा जोखिम ले रहा हूं।
और SBI डिफेंस ईटीएफ का क्या हुआ?
5 अगस्त 2026 को SBI BSE India Defence ETF का ड्राफ्ट सेबी के पास दाखिल हुआ था।
इसके बाद 13 अगस्त को इसके FoF का ड्राफ्ट भी दाखिल किया गया।
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है।
सिर्फ ड्राफ्ट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि ईटीएफ लॉन्च हो गया।
जब तक स्कीम का NFO नहीं आता और ईटीएफ वास्तव में लिस्ट नहीं होता, तब तक उसे मौजूदा डिफेंस ईटीएफ की तुलना में शामिल करना सही नहीं होगा।
मैंने यह बात इसलिए यहां रखी है क्योंकि डिफेंस ईटीएफ की तस्वीर बहुत तेजी से बदल रही है।
आज तीन विकल्प हैं, कुछ महीनों बाद संख्या और बढ़ सकती है। इसलिए इस लेख को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होगा।
तो फिर “बेस्ट” डिफेंस ईटीएफ कौन-सा है?
अब वापस उसी सवाल पर आते हैं जिससे हमने शुरुआत की थी।
अगर तुलना केवल Motilal और Groww की है, तो दोनों एक ही Nifty India Defence Index को फॉलो करते हैं।
यानी इनके अंदर मिलने वाला मूल इंडेक्स एक्सपोजर काफी हद तक एक जैसा है।
ऐसे में फर्क देखने के लिए खर्च, ट्रैकिंग, लिक्विडिटी और बाजार में खरीदने-बेचने की आसानी जैसी चीजें ज्यादा काम की हैं।
लेकिन Mirae आते ही मामला थोड़ा बदल जाता है।
Mirae का ईटीएफ BSE India Defence Index को फॉलो करता है यानी यहां केवल दो ईटीएफ के खर्च की तुलना करना काफी नहीं है।
पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों इंडेक्स किन कंपनियों को लेते हैं और उनका वजन कैसे तय होता है।
अब HDFC Defence Fund की बात करें तो वह एक एक्टिव फंड है। इसलिए उसे इन ईटीएफ के साथ एक ही लाइन में खड़ा करके तुलना करना सही नहीं होगा।
यहां फंड मैनेजर खुद कंपनियों और उनके वजन पर फैसले ले सकता है।
इसलिए सवाल सिर्फ खर्च का नहीं रहता, बल्कि यह भी देखना पड़ता है कि उसका पोर्टफोलियो अपने बेंचमार्क से कितना अलग है।
तो हर किसी के लिए एक ही “विजेता” निकालना मुझे सही तरीका नहीं लगता।
पहले यह समझिए कि आप कौन-सा इंडेक्स या किस तरह का फंड देख रहे हैं। उसके बाद उसी तरह के विकल्पों में खर्च, ट्रैकिंग, लिक्विडिटी और दूसरी जरूरी चीजों की तुलना कीजिए।
इससे फैसला ज्यादा साफ रहेगा और बेवजह का भ्रम भी कम होगा।
निष्कर्ष
सिर्फ नाम देखकर कोई डिफेंस ईटीएफ “बेस्ट” नहीं हो जाता।
पहले उसका इंडेक्स देखिए, फिर होल्डिंग्स और कंसंट्रेशन समझिए।
उसके बाद खर्च, ट्रैकिंग और लिक्विडिटी जैसी चीजों पर नजर डालिए।
डिफेंस बजट बढ़ना या सेक्टर से अच्छी खबरें आना जरूर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे रिटर्न भी वैसे ही मिलेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MODEFENCE क्या किसी कंपनी का शेयर है?
नहीं। MODEFENCE किसी एक कंपनी का शेयर नहीं है। यह Motilal Oswal Nifty India Defence ETF का एक्सचेंज कोड है। इसकी एक यूनिट खरीदने का मतलब है कि आप Nifty India Defence Index में शामिल कंपनियों के पोर्टफोलियो में हिस्सा ले रहे हैं।
क्या डिफेंस ईटीएफ में SIP की जा सकती है?
यह आपके ब्रोकर या प्लेटफॉर्म पर निर्भर करता है कि वह ईटीएफ में नियमित निवेश की सुविधा देता है या नहीं। आसान भाषा में समझें तो आप हर महीने एक तय रकम से ईटीएफ की यूनिट खरीद सकते हैं।
लेकिन यहाँ एक बात याद रखिए। हर महीने खरीदने से आपकी खरीद अलग-अलग कीमतों पर होती है, पर इससे डिफेंस जैसे एक ही सेक्टर में निवेश करने का जोखिम खत्म नहीं होता।
क्या दो डिफेंस ईटीएफ रखने से जोखिम कम हो जाता है?
जरूरी नहीं।
मान लीजिए आपके पास दो डिफेंस ईटीएफ हैं और दोनों ही Nifty India Defence Index को फॉलो करते हैं। ऐसे में दोनों के पोर्टफोलियो में काफी हद तक वही कंपनियाँ हो सकती हैं।
यानी ईटीएफ दो हैं, लेकिन असली निवेश लगभग एक जैसा हो सकता है। इसलिए केवल दो अलग नाम देखकर diversification मान लेना सही नहीं है। पहले दोनों की holdings देखिए।
क्या सबसे कम Expense Ratio वाला डिफेंस ईटीएफ सबसे अच्छा है?
नहीं। Expense Ratio जरूर देखना चाहिए, लेकिन केवल इसी आधार पर किसी ईटीएफ को बेहतर नहीं माना जा सकता।
यह भी देखना जरूरी है कि वह कौन-सा इंडेक्स फॉलो कर रहा है, इंडेक्स को कितनी सही तरह track कर रहा है, उसमें खरीद-बिक्री कितनी आसानी से होती है और पोर्टफोलियो कुछ गिनी-चुनी कंपनियों में कितना केंद्रित है।
डिफेंस ईटीएफ और HDFC Defence Fund में मुख्य फर्क क्या है?
डिफेंस ईटीएफ आमतौर पर किसी तय इंडेक्स को फॉलो करता है। यानी इंडेक्स में जिन कंपनियों को जितना वजन मिला है, फंड भी लगभग उसी ढांचे में निवेश करने की कोशिश करता है।
HDFC Defence Fund एक active fund है। इसमें fund manager इंडेक्स से अलग कंपनियाँ चुन सकता है और उनका वजन भी अलग रख सकता है।
इसलिए दोनों को केवल पिछले return या Expense Ratio देखकर compare करना सही नहीं होगा।
क्या डिफेंस बजट बढ़ने से डिफेंस ईटीएफ का return भी बढ़ना तय है?
नहीं।
सरकार का Defence Budget बढ़ना कंपनियों के लिए ज्यादा business opportunities का संकेत हो सकता है, लेकिन शेयर बाजार इतना सीधा हिसाब नहीं लगाता।
मान लीजिए किसी कंपनी को बड़े orders मिलने की उम्मीद पहले से ही थी और उसका share price काफी बढ़ चुका है। ऐसे में अच्छी खबर आने के बाद भी जरूरी नहीं कि share price उसी अनुपात में बढ़े।
Return पर valuation, orders को समय पर पूरा करना, profit margin, कंपनियों की कमाई और बाजार की पहले से बनी उम्मीदें इन सबका असर पड़ता है।






