चाँदी में निवेश करने वालों के सामने इन दिनों एक नई उलझन खड़ी हो गई है।
बाजार में चाँदी का भाव कुछ दिखाई देता है और जब मोबाइल पर Silver ETF का भाव देखने जाते हैं, तो वहाँ कुछ और ही चल रहा होता है।
कभी चाँदी के मुकाबले ETF अधिक तेजी से बढ़ जाता है, तो कभी उससे भी ज्यादा गिर जाता है।
अब निवेशक बेचारा परेशान!
उसने तो यही सोचकर Silver ETF खरीदा था कि चाँदी की कीमत बढ़ेगी तो उसके निवेश की कीमत भी उसी हिसाब से बढ़ेगी।
मगर यहाँ तो चाँदी का अपना हिसाब चल रहा है और ETF का अपना!
तो आखिर मामला क्या है?
क्या ETF में चाँदी के अलावा भी कोई ऐसी चीज है जिसकी कीमत अपने आप बढ़ती और घटती रहती है?
चलिए, इस पूरे मामले को थोड़ा आसान तरीके से समझते हैं।
Silver ETF क्या है और कैसे काम करता है?
मान लीजिए, एक व्यक्ति चाँदी में निवेश करना चाहता है।
अब घर में चाँदी की ईंटें खरीदकर रखने का झंझट कौन पाले!
उन्हें सुरक्षित रखिए, शुद्धता जाँचिए और बेचने के समय फिर खरीदार तलाशिए।
उसने सोचा कि क्यों न Silver ETF के माध्यम से ही चाँदी में निवेश कर लिया जाए।
अब उसने मोबाइल खोला, डीमैट खाते में गया और Silver ETF की 100 यूनिट खरीद लीं।
उसे लगा कि अब उसके पास चाँदी है, बस फर्क इतना है कि वह घर की अलमारी के बजाय डीमैट खाते में रखी है।
लेकिन बात इतनी सीधी भी नहीं है।
असल में उसने चाँदी की ईंट नहीं, बल्कि Silver ETF की यूनिट खरीदी हैं।
Silver ETF एक म्यूचुअल फंड योजना है, जो मुख्य रूप से भौतिक चाँदी और उससे जुड़े दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाती है और भारत में चाँदी की कीमत को ट्रैक करने का प्रयास करती है।
इसकी यूनिट शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदी और बेची जाती हैं।
यानी अब आपके पास फंड की यूनिट हैं, न कि घर ले जाने के लिए चाँदी की कोई ईंट।
यहाँ ध्यान दें कि सामान्य छोटे निवेशक अपनी यूनिट के बदले सीधे भौतिक चाँदी नहीं ले सकते।
क्या Silver ETF के पीछे सचमुच असली चाँदी होती है?
अब कुछ लोग पूछते हैं कि ETF के पीछे असली चाँदी होती भी है या केवल कागजी हिसाब ही है।
देखिए, Silver ETF अपने पैसे का अधिकतर हिस्सा असली चाँदी में लगाता है।
SEBI के नियमों के अनुसार Silver ETF को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 95% चाँदी और उससे जुड़े निवेश विकल्पों में लगाना होता है।
इसके अलावा कुछ पैसा दूसरे विकल्पों में भी लगाया जा सकता है, बशर्ते नियम इसकी अनुमति देते हों।
लेकिन आपके पास उस फंड की यूनिट होती हैं और अलग से आपके नाम पर कोई चाँदी की ईंट नहीं रखी जाती है।
अब इन यूनिट का मूल्य चाँदी की कीमत से जुड़ा तो रहता है, मगर स्टॉक एक्सचेंज पर इनकी खरीद और बिक्री में एक और चीज अपना काम करती है।
वह है खरीदारों और बेचने वालों की संख्या।
और यहीं से शुरू होती है असली कहानी!
Silver ETF की NAV और Premium क्या होता है?
मान लीजिए, किसी Silver ETF की एक यूनिट की NAV ₹100 है।
NAV यानी Net Asset Value।
आसान भाषा में कहें तो फंड के पास मौजूद संपत्तियों के मूल्य में से उसकी देनदारियाँ घटाकर, बची हुई रकम को कुल यूनिट से भाग देने पर एक यूनिट की NAV निकलती है।
लेकिन यहाँ एक बात ध्यान रखें कि NAV आमतौर पर दिन का कारोबार खत्म होने के बाद निकाली जाती है।
तो फिर बाजार खुला रहने के दौरान ETF की कीमत किससे मिलाएँगे?
इसके लिए iNAV होती है, जो बाजार के दौरान ETF की एक यूनिट का अनुमानित मूल्य बताती है।
फिलहाल अपने उदाहरण में मान लेते हैं कि उसी समय ETF की iNAV भी ₹100 है।
अब इसी ETF को खरीदने के लिए अचानक बहुत सारे लोग स्टॉक एक्सचेंज पर पहुँच गए।
हर किसी को चाँदी में तेजी दिखाई दे रही है।
खरीदने वाले ज्यादा हैं और उस भाव पर बेचने वाले कम।
ऐसी स्थिति में ETF की बाजार कीमत बढ़कर ₹110 पहुँच सकती है।
जरा ध्यान दीजिए!
फंड की एक यूनिट का अनुमानित मूल्य यानी iNAV तो अभी भी ₹100 है, मगर स्टॉक एक्सचेंज पर वही यूनिट ₹110 में बिक रही है।
यानी उसकी iNAV से ₹10 अधिक।
इसे कहते हैं Premium पर ट्रेड करना।
हमारे उदाहरण में यह Premium हुआ 10 प्रतिशत।

अब मान लीजिए कि किसी निवेशक ने ₹110 के भाव पर 100 यूनिट खरीद लीं।
उसने कुल ₹11,000 खर्च किए।
जबकि उन 100 यूनिट की iNAV के आधार पर कीमत केवल ₹10,000 थी।
इसका मतलब है कि निवेशक ने शुरुआत में ही उस समय के अनुमानित मूल्य के मुकाबले ₹1,000 अधिक चुका दिए!
अगर Silver ETF का Premium खत्म हो जाए तो कितना नुकसान होगा?
चलिए अब कहानी में थोड़ा बदलाव करते हैं।
मान लीजिए कि कुछ दिनों बाद Silver ETF को लेकर बाजार में मची हलचल शांत हो गई।
अब खरीदारों की भीड़ कम हो गई और ETF की बाजार कीमत वापस ₹100 पर आ गई।
यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे काल्पनिक उदाहरण में चाँदी की कीमत और फंड की NAV दोनों पहले जितनी ही हैं।
यानी चाँदी में कोई गिरावट नहीं आई।
मगर उस व्यक्ति की 100 यूनिट्स अब केवल ₹10,000 की रह गईं।
उसने खर्च किए थे ₹11,000 और अब उनकी कीमत ₹10,000 है।
लीजिए साहब! चाँदी अपने भाव पर खड़ी है, मगर निवेशक के ₹1,000 कम हो गए!
यानी लगभग 9.09 प्रतिशत का नुकसान।
अब यहाँ आप पूछ सकते हैं कि जब Premium 10 प्रतिशत था तो नुकसान 9.09 प्रतिशत क्यों हुआ?
देखिए, नुकसान की गणना उसके वास्तविक खरीद मूल्य ₹11,000 पर होगी, न कि ₹10,000 की NAV पर।
इस उदाहरण में Brokerage और दूसरे खर्च शामिल नहीं हैं।
अब आप समझ सकते हैं कि केवल चाँदी का भाव देखकर Silver ETF में अपने निवेश का पूरा हिसाब नहीं लगाया जा सकता।
चाँदी की कीमत बढ़ने पर भी Silver ETF में नुकसान कैसे हो सकता है?
देखिये…. कहानी अभी समाप्त नहीं हुई है।
मान लीजिए कि चाँदी की कीमत बढ़ने के कारण उसी ETF की NAV ₹100 से बढ़कर ₹105 हो गई।
यानी फंड की NAV में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
लेकिन इसी दौरान ETF का Premium समाप्त हो गया और Stock Exchange पर उसकी बाजार कीमत भी ₹105 हो गई।
अब उस निवेशक की 100 यूनिट्स की कीमत कितनी होगी?
₹10,500।
जबकि उसने खर्च किए थे ₹11,000।
यानी अभी भी ₹500 का नुकसान!
अब जरा सोचिए।
जिस चाँदी में निवेश किया था, उससे जुड़ी फंड की NAV तो 5 प्रतिशत बढ़ गई, मगर निवेशक का पैसा लगभग 4.55 प्रतिशत घट गया।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने शुरुआत में NAV से कहीं अधिक कीमत चुकाई थी।
यही वह बात है जिसे समझे बिना केवल Silver ETF की कीमत में आई तेजी देखकर कोई गलत निष्कर्ष निकाल सकता है।
Silver ETF में Premium और Discount क्यों बनता है?
अब सवाल है कि NAV और ETF की बाजार कीमत अलग अलग क्यों होती हैं?
देखिए, Stock Exchange पर ETF की यूनिट्स की खरीद और बिक्री होती रहती है।
जब अचानक खरीदने वालों की मांग बढ़ जाती है और उस भाव पर बेचने वाले कम होते हैं, तो बाजार कीमत NAV से ऊपर जा सकती है।
और जब बेचने का दबाव अधिक होता है तो बाजार कीमत NAV से नीचे भी आ सकती है।
NAV से ऊपर के भाव को Premium और नीचे के भाव को Discount कहते हैं।
लेकिन Discount देखकर भी यह नहीं मान लेना चाहिए कि कोई चीज अपने आप सस्ती या फायदेमंद हो गई।
क्योंकि Discount आगे बढ़ भी सकता है और बेचने के समय आपको उस भाव पर खरीदार मिलने में परेशानी भी हो सकती है।
इसलिए अगर कोई ETF NAV से नीचे दिख रहा है तो सिर्फ उसी वजह से अगले दिन उसका भाव ऊपर आना तय नहीं है।
और हाँ, कारोबार के दौरान Premium या Discount देखते समय ETF की बाजार कीमत की तुलना उसी समय की iNAV से करना ज्यादा सही होगा।
कल की NAV और आज के बाजार भाव को मिलाकर नतीजा निकालना गलत हो सकता है।
Market Makers के रहते भी Silver ETF का Premium क्यों बढ़ता है?
वैसे ETF के बाजार में Market Makers और Authorised Participants नाम के संस्थागत भागीदार भी होते हैं।
इनका एक काम बड़ी मात्रा में ETF की यूनिट्स बनवाने, वापस लेने और बाजार में उनकी खरीद और बिक्री को सुचारु रखने में मदद करना है।
इस व्यवस्था के कारण सामान्य परिस्थितियों में ETF की बाजार कीमत और उसकी NAV के बीच बहुत बड़ा अंतर लंबे समय तक बने रहने की संभावना कम हो सकती है।
मगर हर समय ऐसा ही होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।
अब मान लीजिए कि अचानक बहुत सारे लोग चाँदी का ETF खरीदने लगे, मगर बाजार में उतनी यूनिट्स उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसी स्थिति में कीमत बढ़ सकती है।
इसी तरह बाजार में पर्याप्त खरीदार या बेचने वाले न हों या भौतिक चाँदी की उपलब्धता में परेशानी आए तो भी Premium या Discount बढ़ सकता है।
जनवरी और फरवरी 2026 में भारतीय Silver ETFs में इस प्रकार की स्थिति देखने को मिली थी।
उस दौरान कई निवेशकों ने ETF की बाजार कीमत और iNAV के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि चाँदी के भाव से अलग ETF इतना ऊपर या नीचे कैसे जा सकता है।
इसलिए चाँदी की कीमत के साथ ETF का Premium, Discount और बाजार में खरीद और बिक्री की स्थिति को भी समझना जरूरी है।
वैसे अगर आप ETF की पूरी कार्यप्रणाली को शुरुआत से समझना चाहते हैं तो हमारा लेख ETF क्या है और कैसे काम करता है? भी पढ़ सकते हैं।
Silver ETF में NAV, iNAV और बाजार भाव में क्या फर्क है?
अब एक और शब्द समझ लीजिए। iNAV!
जब आप किसी ETF की जानकारी देखते हैं तो कई जगह NAV के साथ iNAV भी लिखा मिलता है।
अब परेशानी यह है कि एक ही ETF के लिए तीन अलग कीमतें दिखाई देने लगती हैं।
एक NAV, दूसरी iNAV और तीसरी स्टॉक एक्सचेंज पर मिलने वाली कीमत जिसे Market Price कहते हैं।
आखिर इन तीनों का मतलब क्या है?
देखिए, NAV यानी Net Asset Value किसी फंड की कुल संपत्ति में से उसकी देनदारियाँ घटाकर निकाली जाती है। फिर उस रकम को कुल यूनिट्स की संख्या से भाग देकर एक यूनिट की NAV पता चलती है।
यह गणना सामान्यतः कारोबारी दिन के अंत में की जाती है।
वहीं iNAV यानी Indicative Net Asset Value कारोबार के दौरान उपलब्ध जानकारी के आधार पर फंड की एक यूनिट की अनुमानित कीमत बताती है।
अब यहाँ एक बात ध्यान रखें कि iNAV भी कोई ऐसी कीमत नहीं है जिस पर आपका सौदा होना निश्चित हो।
विशेषकर Silver ETF में चाँदी का नया भाव उपलब्ध न होने के कारण iNAV कुछ देर तक एक ही स्तर पर दिखाई दे सकती है।
इसलिए उसके साथ दिख रहे समय को समझना भी जरूरी है।
वैसे NSE की ETF जानकारी वाली वेबसाइट और संबंधित म्यूचुअल फंड की वेबसाइट पर iNAV देखी जा सकती है।
हर मोबाइल ऐप में यह साफ दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है।
तीसरी कीमत है Market Price।
यही वह भाव है जिस पर स्टॉक एक्सचेंज में वास्तव में सौदा होता है।
अब तीनों कीमतों की भूमिका साफ हुई होगी।
NAV फंड की गणना है, iNAV कारोबार के दौरान उसकी अनुमानित कीमत बताती है और Market Price वह कीमत है जिस पर बाजार में यूनिट्स खरीदी और बेची जाती हैं।
Silver ETF खरीदते समय iNAV और बाजार भाव कहाँ देखें?
यहाँ एक गलती और अक्सर हो जाती है।
लोग कल शाम की NAV को आज दोपहर के ETF भाव से मिलाकर Premium निकाल लेते हैं।
मगर दोनों अलग समय की कीमतें हैं।
इसलिए कारोबार के दौरान उपलब्ध iNAV और उसका समय देखे बिना उस अंतर का सही मतलब नहीं निकाला जा सकता।
अब मान लीजिए आपके मोबाइल पर आखिरी सौदा ₹105 में दिख रहा है।
लेकिन उसी समय बाजार में खरीदने वाला ₹103 देने को तैयार है और बेचने वाला ₹106 माँग रहा है।
तब अगर आप उस ETF को खरीदना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि आपको वह ₹105 में ही मिल जाए।
इसके लिए बाजार में खरीदने और बेचने वालों के भाव भी देखने होंगे।
वैसे NSE पर ETF की जानकारी में NAV, iNAV और बाजार के भाव देखे जा सकते हैं।
अब एक सवाल और है।
अगर किसी Silver ETF की iNAV ₹100 है और बाजार में उसकी यूनिट ₹95 में मिल रही है तो क्या इसे खरीदने पर ₹5 का फायदा पक्का है?
जी नहीं!
क्योंकि Discount आगे भी बना रह सकता है। इसके अलावा चाँदी की कीमत और ETF की NAV भी घट सकती है।
इसलिए केवल Discount दिखाई देने से यह नहीं मान लेना चाहिए कि ETF की कीमत तुरंत NAV के बराबर पहुँच जाएगी।
क्या ₹20 वाला Silver ETF, ₹200 वाले से सस्ता है?
अब जरा एक और दिलचस्प बात देख लीजिए।
मान लीजिए कि आपको दो Silver ETFs दिखाई देते हैं।
पहले की एक यूनिट ₹20 में मिल रही है और दूसरे की ₹200 में।
किसी नए निवेशक को लग सकता है कि ₹20 वाला ETF काफी सस्ता है।
मगर क्या वाकई ऐसा है?
यह जरूरी नहीं है।
क्योंकि दोनों फंडों की एक यूनिट के पीछे मौजूद चाँदी और दूसरी संपत्तियों का अनुपात अलग हो सकता है।
अब मान लीजिए एक ETF की एक यूनिट के पीछे चाँदी की मात्रा दूसरे ETF की तुलना में दस गुना है।
तब जाहिर सी बात है कि दोनों की एक यूनिट का भाव भी अलग हो सकता है।
इसलिए किसी ETF की एक यूनिट का भाव कम होने से यह साबित नहीं होता कि वह दूसरे ETF के मुकाबले सस्ता या बेहतर है।
इसके अलावा प्रत्येक ETF का Expense Ratio, Tracking Difference, कारोबार की मात्रा और खरीदने तथा बेचने के भावों का अंतर भी अलग हो सकता है।
इन्हीं कारणों से एक ही धातु को ट्रैक करने वाले अलग अलग ETFs का प्रदर्शन बिल्कुल एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
कई बार किसी ETF की यूनिट्स का विभाजन भी हो सकता है।
ऐसी स्थिति में एक यूनिट का भाव कम हो जाएगा और आपके पास यूनिट्स की संख्या बढ़ जाएगी।
लेकिन केवल विभाजन होने से आपके कुल निवेश का मूल्य अपने आप नहीं बढ़ता।
भारत और विदेश में चाँदी का भाव अलग क्यों होता है?
एक बात और समझिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाँदी की कीमत डॉलर में दिखाई जाती है, जबकि भारतीय Silver ETFs की NAV रुपये में होती है।
इसलिए डॉलर और रुपये की विनिमय दर, भारत में चाँदी की स्थानीय कीमत और लागू आयात शुल्क जैसे कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
वैसे SEBI ने 26 फरवरी 2026 को Gold और Silver ETFs में रखी भौतिक धातु के मूल्यांकन का तरीका बदलने का निर्देश दिया था।
1 अप्रैल 2026 से फंडों के पास रखी चाँदी और सोने का मूल्य निकालने के लिए मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा प्रकाशित घरेलू हाजिर भावों का उपयोग लागू हुआ।
ये वही भाव हैं जिनका इस्तेमाल भौतिक डिलीवरी वाले वायदा सौदों के निपटान में किया जाता है।
इस नियम को बाद में SEBI के 20 मार्च 2026 के म्यूचुअल फंड संबंधी मुख्य निर्देशों में भी शामिल किया गया।
यहाँ ध्यान रखें कि यह बदलाव फंड के पास रखी चाँदी का मूल्य निकालने से संबंधित है।
इससे स्टॉक एक्सचेंज पर ETF की खरीद और बिक्री का भाव निश्चित नहीं हो जाता।
इसलिए आज की NAV को पुराने मूल्यांकन तरीके के आधार पर समझने की कोशिश करेंगे तो हिसाब गड़बड़ा सकता है।
वैसे घर के पास सुनार की दुकान पर मिलने वाला चाँदी का भाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार का डॉलर वाला भाव और ETF की एक यूनिट की कीमत एक ही चीज नहीं हैं।
तीनों में वजन, मुद्रा, कर और कीमत तय होने के तरीके का फर्क हो सकता है।
Silver ETF का भाव चाँदी की कीमत से अलग क्यों चल सकता है?
अब इस पूरी कहानी में एक बात तो समझ आती है।
चाँदी की कीमत बढ़ना और आपके Silver ETF की बाजार कीमत का उसी अनुपात में बढ़ना दो अलग बातें हैं।
दोनों का आपस में गहरा संबंध जरूर है, लेकिन दोनों हमेशा एक जैसी चाल नहीं चलतीं।
एक तरफ चाँदी की कीमत बदल रही होती है तो दूसरी तरफ स्टॉक एक्सचेंज पर ETF की यूनिट्स की खरीद और बिक्री भी चल रही होती है।
कई बार बाजार में अधिक माँग होने के कारण ETF की कीमत उसकी NAV से ऊपर चली जाती है।
तो कभी बेचने वालों की संख्या बढ़ने से वही यूनिट NAV से नीचे भी मिल सकती है।
और हाँ, Silver ETF में निवेश से पहले केवल चाँदी की भविष्य की कीमत के बारे में सोचना ही पर्याप्त नहीं है।
ETF कैसे काम करता है, उसकी NAV क्या बताती है और स्टॉक एक्सचेंज पर Premium या Discount कैसे बनता है, इन बातों की जानकारी भी जरूरी है।
चाँदी 2% गिरी, तो Silver ETF 5% कैसे गिर गया?

खैर, अब फिर उसी सवाल पर लौटते हैं।
आखिर चाँदी का भाव कुछ और और Silver ETF का भाव कुछ और क्यों?
क्योंकि Silver ETF केवल चाँदी की कीमत का मामला नहीं है।
इसमें उस धातु का मूल्य, फंड की NAV, स्टॉक एक्सचेंज पर यूनिट्स की माँग और उपलब्धता, सभी अपना असर डाल सकते हैं।
इसके अलावा जिस समय के चाँदी के भाव से आप तुलना कर रहे हैं, उस समय और ETF के कारोबार के समय में भी अंतर हो सकता है।
इसलिए अगली बार जब कोई मित्र कहे कि चाँदी तो केवल दो प्रतिशत गिरी है, मगर मेरा Silver ETF पाँच प्रतिशत कैसे गिर गया, तो उससे एक प्रश्न अवश्य पूछिएगा।
भाई, चाँदी का भाव तो देख लिया, मगर जिस दिन ETF खरीदा था, उस दिन उसकी NAV कितनी थी और आपने उसके ऊपर कितना Premium दिया था?
कहीं ऐसा तो नहीं कि चाँदी के साथ ही उस दिन की खरीदारी की जल्दबाजी का हिसाब भी चुकाना पड़ रहा हो!
और एक आखिरी बात।
चाँदी खरीदना तथा चाँदी की कीमत से जुड़ी किसी ETF की यूनिट्स खरीदना एक जैसी बात नहीं है।
दोनों में जोखिम हैं, मगर उनका स्वरूप अलग हो सकता है।
क्या आपने कभी अपने Silver ETF की Market Price और NAV के बीच अंतर देखा है?
अस्वीकरण: इस लेख में हमने Silver ETF की कीमत, NAV और Premium के बीच के अंतर को आसान उदाहरणों से समझाने का प्रयास किया है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम आपको किसी ETF को खरीदने या बेचने की सलाह दे रहे हैं। NiveshHindi कोई SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार या रिसर्च एनालिस्ट नहीं है। इसलिए अपना पैसा कहीं भी लगाने से पहले उससे जुड़े जोखिम और खर्चों को अच्छी तरह समझ लें।
संदर्भ एवं स्रोत (References)
1. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (26 February 2026). Valuation of Physical Gold and Silver held by Gold and Silver Exchange Traded Funds. SEBI Circular.
2. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (20 March 2026). Master Circular for Mutual Funds. SEBI.
3. Securities and Exchange Board of India (SEBI). (2026). SEBI (Mutual Funds) Regulations, 1996, as amended up to October 2026.
4. SEBI Investor Education. (n.d.). Understanding Exchange Traded Funds (ETFs). Securities and Exchange Board of India.
5. SEBI Investor Education. (n.d.). Understanding Net Asset Value (NAV). Securities and Exchange Board of India.
6. National Stock Exchange of India (NSE). (n.d.). Exchange Traded Funds: Market Price, NAV, iNAV and Trading Mechanism. NSE Investor Education Resources.






